जशपुर जिले के 48 प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार हेतु छत्तीसगढ़ सरकार ने 2.03 करोड़ रुपये मंजूर किए, जिससे धार्मिक पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर एक और ठोस कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर जशपुर जिले के 48 प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं विकास के लिए 2 करोड़ 3 लाख 59 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस निर्णय से न केवल धार्मिक स्थलों का संरचनात्मक पुनर्निर्माण होगा, बल्कि स्थानीय पर्यटन और रोजगार को भी नई गति मिलेगी।
संस्कृति और श्रद्धा की भूमि: जशपुर
मुख्यमंत्री साय ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,
“जशपुर की धरती श्रद्धा, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र रही है। इन मंदिरों का जीर्णोद्धार सिर्फ ईंट-पत्थर का कार्य नहीं, बल्कि हमारी आत्मिक विरासत का पुनर्जागरण है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का उद्देश्य हर ग्राम के धार्मिक स्थलों को सुव्यवस्थित करना है, जिससे वहां भक्ति का वातावरण बने और साथ ही ग्राम्य अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिले।
किन मंदिरों को मिलेगा विकास का लाभ?
धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन मंदिरों को जीर्णोद्धार हेतु राशि प्रदान की गई है, उनमें शामिल हैं:
- ग्राम चेटबा के हनुमान, गायत्री और श्रीराम मंदिर — प्रत्येक के लिए ₹5 लाख
- ग्राम दोकड़ा के हनुमान, राधाकृष्ण और डुमरटोली मंदिर — कुल ₹13 लाख
- ग्राम पण्डरापाठ स्थित प्रसिद्ध नागेश्वर धाम मंदिर — ₹4.79 लाख
- रायकेरा स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर — ₹4.80 लाख
इसके अतिरिक्त, कटंगखार, नारियरडांड, कोहलनझरिया, सिंगीबहार, अमडीहा, समडमा, साजबहार, बटुराबहर, सिंदरीमुंडा, हेठघिंचा, कुनकुरी थाना परिसर मंदिर, और अन्य ग्रामों के शिव एवं हनुमान मंदिरों के लिए भी ₹3 से ₹5 लाख तक की राशि स्वीकृत की गई है।
मंदिरों के जीर्णोद्धार से क्या होंगे लाभ?
- धार्मिक पहचान का संरक्षण
प्राचीन मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं होते, वे ग्रामों की पहचान और सांस्कृतिक गौरव भी होते हैं। इनका पुनर्निर्माण आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करेगा। - स्थानीय पर्यटन को प्रोत्साहन
इन धार्मिक स्थलों का विकास धार्मिक पर्यटन को नया आयाम देगा। ग्रामीण क्षेत्रों में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि से स्थानीय व्यापार और होटल-धर्मशालाओं की मांग बढ़ेगी। - ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल
जीर्णोद्धार कार्यों से स्थानीय कारीगरों, राजमिस्त्रियों और मजदूरों को रोजगार मिलेगा। साथ ही मंदिर में आने वाले दर्शनार्थियों से स्थानीय उत्पादों की बिक्री भी बढ़ेगी। - भक्ति और अध्यात्म का वातावरण
मंदिरों के सौंदर्यीकरण और बेहतर प्रबंधन से वहां भक्ति का वातावरण और सामाजिक एकता सुदृढ़ होगी।
मुख्यमंत्री को मिला जनसमर्थन
इस निर्णय की सराहना स्थानीय मंदिर समितियों, पुजारियों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामवासियों ने की है। उनका मानना है कि यह कदम जशपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को न केवल संरक्षित करेगा, बल्कि उसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी सहायक सिद्ध होगा। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार प्रकट किया है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा धार्मिक स्थलों के विकास हेतु उठाया गया यह कदम सांस्कृतिक पुनर्जागरण, धार्मिक पर्यटन और स्थानीय विकास का समन्वित उदाहरण बन रहा है। जशपुर के 48 मंदिरों का जीर्णोद्धार न केवल प्रदेश की पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि श्रद्धा और विकास की नई राहें खोलेगा।










