रायपुर की माधुरी जंघेल ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर डेयरी और खेती के माध्यम से आय बढ़ाई और ‘लखपति दीदी’ बनकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की दिशा में स्व-सहायता समूहों की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। रायपुर जिले की माधुरी जंघेल इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आई हैं, जिन्होंने स्व-सहायता समूह से जुड़कर डेयरी और खेती के माध्यम से अपनी जिंदगी बदल दी और आज ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।
माधुरी जंघेल पहले एक साधारण ग्रामीण महिला थीं, जिनकी आय के सीमित साधन थे। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी चुनौतीपूर्ण होता था। लेकिन स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया।
स्व-सहायता समूह से मिली नई दिशा
माधुरी जंघेल ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर बचत और ऋण की सुविधा का लाभ लिया। समूह के माध्यम से उन्हें आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण मिला, जिससे उन्होंने डेयरी और खेती का काम शुरू किया।
उन्होंने छोटे स्तर से शुरुआत करते हुए कुछ पशु खरीदे और दूध उत्पादन का कार्य शुरू किया। इसके साथ ही उन्होंने खेती में भी आधुनिक तरीकों को अपनाया।
डेयरी और खेती से बढ़ी आय
माधुरी जंघेल ने डेयरी व्यवसाय के साथ-साथ खेती को भी आय का प्रमुख स्रोत बनाया। दूध उत्पादन से नियमित आय मिलने लगी, जबकि खेती से अतिरिक्त आय प्राप्त हुई।
धीरे-धीरे उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया और आय में लगातार वृद्धि होने लगी। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और जीवन स्तर में सुधार आया।
‘लखपति दीदी’ बनने की कहानी
लगातार मेहनत और सही दिशा में प्रयासों के चलते माधुरी जंघेल ने सालाना एक लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर ‘लखपति दीदी’ का दर्जा हासिल किया। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है।
आत्मविश्वास और पहचान में वृद्धि
आर्थिक रूप से सशक्त बनने के साथ-साथ माधुरी जंघेल के आत्मविश्वास में भी वृद्धि हुई है। अब वे सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा
माधुरी जंघेल की सफलता से आसपास की कई महिलाएं प्रेरित हुई हैं। वे उनसे मार्गदर्शन लेकर डेयरी और खेती जैसे व्यवसायों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
सरकारी योजनाओं का मिला लाभ
माधुरी जंघेल को विभिन्न सरकारी योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी लाभ मिला, जिससे उन्हें व्यवसाय को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिली।
ग्रामीण विकास की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर ग्रामीण विकास को गति दी जा सकती है। माधुरी जंघेल की कहानी इसी दिशा में एक सफल उदाहरण है।
उनकी यह सफलता यह दर्शाती है कि यदि महिलाओं को अवसर, प्रशिक्षण और सहयोग मिले तो वे आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।




