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छत्तीसगढ़

कृषि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को मिला सहकारिता का व्यावहारिक ज्ञान, जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

रायपुर कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को सहकारिता के सिद्धांत, कार्यप्रणाली और कृषि विकास में इसकी भूमिका की जानकारी दी गई।

रायपुर। कृषि क्षेत्र में सहकारिता की भूमिका को समझाने के उद्देश्य से रायपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को सहकारिता के सिद्धांत, कार्यप्रणाली और कृषि विकास में इसकी अहम भूमिका की जानकारी दी गई। कार्यक्रम को विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया गया।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि सहकारी संस्थाएं किसानों को संगठित कर उन्हें आर्थिक, तकनीकी और विपणन से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं। इससे किसानों की आय बढ़ाने और जोखिम कम करने में मदद मिलती है।

सहकारिता और कृषि का गहरा संबंध

विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में कृषि क्षेत्र का सहकारिता से गहरा संबंध है। दुग्ध उत्पादन, बीज वितरण, उर्वरक आपूर्ति और फसल विपणन जैसे क्षेत्रों में सहकारी संस्थाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। विद्यार्थियों को इन उदाहरणों के माध्यम से सहकारिता की व्यावहारिक उपयोगिता समझाई गई।

छात्रों को दी गई व्यावहारिक जानकारी

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को सहकारी समितियों की संरचना, पंजीकरण प्रक्रिया, प्रबंधन प्रणाली और वित्तीय संचालन के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि युवा कृषि स्नातक सहकारिता के माध्यम से स्वरोजगार के अवसर कैसे बना सकते हैं।

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विशेषज्ञों का मार्गदर्शन

कार्यक्रम में सहकारिता विभाग के अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में कृषि पेशेवरों को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ संगठनात्मक और प्रबंधन कौशल की भी आवश्यकता होगी।

किसानों की आय बढ़ाने में सहकारिता की भूमिका

वक्ताओं ने कहा कि सहकारिता मॉडल से छोटे और सीमांत किसानों को सबसे अधिक लाभ मिलता है। सामूहिक प्रयास से उत्पादन लागत घटती है और बाजार में बेहतर दाम मिल पाते हैं।

विद्यार्थियों में दिखा उत्साह

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने सहकारिता से जुड़े सवाल पूछे और चर्चा में सक्रिय भागीदारी की। छात्रों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम उन्हें पढ़ाई के साथ वास्तविक कृषि व्यवस्था को समझने में मदद करते हैं।

शिक्षा और व्यवहार का समन्वय

कृषि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के साथ व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है। सहकारिता पर आधारित यह कार्यक्रम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भविष्य के लिए उपयोगी पहल

विशेषज्ञों का मानना है कि सहकारिता का ज्ञान विद्यार्थियों को भविष्य में किसान समूहों, एफपीओ और सहकारी संस्थाओं के साथ कार्य करने में सहायक होगा।

रायपुर कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम छात्रों के लिए सहकारिता को समझने का एक सार्थक अवसर साबित हुआ।


Heshma lahre
लेखक: Heshma lahre

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.