LIVE बुधवार, 13 मई 2026
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मध्य प्रदेश

बालाघाट की सुमा दीदी बनीं बिजनेस वुमन

भोपाल 
"जज़्बा हो तो हमारी माताएं-बहनें भी बिज़नेस वुमन बन सकती हैं", प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' में ये बात कहते हुए मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले की एक महिला उद्यमी, सुमा उईके का विशेष रूप से उल्लेख किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बताया कि कटंगी विकासखंड के ग्राम भजियापार की रहने वाली सुमा उईके ने कैसे अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और आजीविका मिशन की मदद से खुद को न सिर्फ आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी के कार्यक्रम ‘मन की बात’ में नाम का ज़िक्र होने के बाद से सुमा उईके के साथ साथ पूरे बालाघाट में उत्साह का माहौल है।

गृहिणी से बनीं सफल उद्यमी
सुमा उईके कभी सिर्फ अपने घर-गृहस्थी के कामों तक सीमित थीं, लेकिन आजीविका मिशन के कर्मियों से मिले मार्गदर्शन से उन्हें स्व-सहायता समूह का महत्व पता चला। इसके बाद उन्होंने आस-पास की महिलाओं को संगठित कर 'आदिवासी आजीविका विकास स्व-सहायता समूह' का गठन किया, जिसकी वह अध्यक्ष बनीं। समूह के माध्यम से उन्होंने आर-सेटी (RSETI) से ऑर्गेनिक मशरूम उत्पादन और CTC से पशुपालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्ष 2021 में उन्होंने 2000 रुपये की ऋण सहायता से मशरूम उत्पादन की शुरुआत की। हालांकि लॉकडाउन के कारण यह कार्य बाधित हुआ, लेकिन सुमा दीदी ने हार नहीं मानी।

दीदी केंटीन से थर्मल थैरेपी तक, दोगुनी से ज़्यादा हुई आय
वर्ष 2022 में उन्हें जनपद पंचायत कटंगी परिसर में 'दीदी केंटीन' संचालन का अवसर मिला, जिससे उनकी मासिक आय लगभग 8000 रुपये होने लगी। यहां उन्होंने अपने समूह की ही एक अन्य महिला को भी रोजगार दिलाया। बाद में, थर्मल थैरेपी के क्षेत्र में उन्होंने प्रशिक्षण लेकर नया व्यवसाय प्रारंभ किया। आजीविका मिशन से जुड़ी होने के कारण उन्हें मुद्रा योजना के अंतर्गत बैंक से 6 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने थर्मल थैरेपी सेंटर की स्थापना की इससे उन्हें मासिक 11000 रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त होने लगी और एक अन्य युवती को भी रोजगार मिला।

आत्मनिर्भर बनीं सुमा दीदी, अन्य महिलाओं को भी कर रहीं प्रेरित
मशरूम उत्पादन, दीदी केंटीन और थर्मल थैरेपी सेंटर जैसे विभिन्न उपक्रमों से जुड़कर सुमा दीदी की मासिक आय अब 19,000 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं, उनके परिवार की कुल मासिक आय लगभग 32,000 रुपये हो गई है। सुमा दीदी आज ग्राम स्तर पर आजीविका मिशन की सशक्त प्रतिनिधि के रूप में काम कर रही हैं और अन्य महिलाओं को समूह से जुड़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में उनके कार्यों की सराहना किया जाना, न केवल सुमा दीदी के लिए बल्कि पूरे बालाघाट और प्रदेशभर के लिए गौरव की बात है। सुमा उईके अब उन हजारों महिलाओं की प्रतीक बन गई हैं जो सीमित संसाधनों के बावजूद सपने देखती हैं और उन्हें साकार भी करती हैं।

 

Rana Sikander
लेखक: Rana Sikander

Versatile journalist with experience in conducting in-depth interviews, analyzing complex data, and producing compelling narratives.