लघु वनोपज संघ के प्रतिनिधिमंडल ने रायपुर में वन मंत्री से मुलाकात कर संग्रहण, मूल्य निर्धारण और प्रसंस्करण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। मंत्री ने सुधार का आश्वासन दिया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की वन अर्थव्यवस्था और लघु वनोपज से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने के उद्देश्य से लघु वनोपज संघ के प्रतिनिधिमंडल ने आज रायपुर में वन मंत्री से सौजन्य भेंट की। इस मुलाकात में वन संसाधनों के संरक्षण, संग्रहण व्यवस्थाओं के सुधार और वन–आधारित आजीविका को मजबूत करने पर विशेष फोकस किया गया। प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न जिलों से आए संगठनों के सदस्य शामिल थे, जिन्होंने मंत्री के सामने अपनी मांगों और सुझावों को रखा।
लघु वनोपज का महत्व
छत्तीसगढ़ देश में लघु वनोपज उत्पादन का प्रमुख राज्य है। लाख, तेंदूपत्ता, चिरौंजी, महुआ, गुग्गल, हर्रा, बेहेड़ा, साल बीज और कई औषधीय वन उत्पाद आदिवासी क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
वन मंत्री ने कहा कि लघु वनोपज न केवल वन संरक्षण को बढ़ावा देते हैं, बल्कि लाखों वन–निवासी परिवारों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत भी हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने रखे ये प्रमुख मुद्दे
प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री के समक्ष कई महत्वपूर्ण बिंदु रखे, जिनमें—
- संग्रहण दरों में उचित वृद्धि,
- तेंदूपत्ता मजदूरी भुगतान की पारदर्शी प्रणाली,
- बाजार आधारित मूल्य निर्धारण,
- औषधीय वनोपज के प्रसंस्करण केंद्रों का विस्तार,
- महिलाओं के स्व–सहायता समूहों को प्राथमिकता
जैसी मांगें शामिल रहीं।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि यदि वनोपज की खरीद और प्रसंस्करण की व्यवस्थाओं में सुधार किया जाए, तो हजारों परिवारों की आय में स्थायी वृद्धि संभव है।
वन मंत्री का आश्वासन
वन मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यान से सुनते हुए कहा कि सरकार लघु वनोपज से जुड़े मुद्दों के प्रति संवेदनशील है।
उन्होंने कहा—
- संग्रहण दरों की नियमित समीक्षा की जाएगी।
- मजदूरी भुगतान को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाएगा।
- प्रसंस्करण इकाइयों और मूल्य संवर्धन केंद्रों को बढ़ाया जाएगा।
- वन उत्पादों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नए बाजार तलाशे जाएंगे।
मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि वन उत्पादों का अधिक से अधिक मूल्य वनोपज संग्राहकों तक पहुँचे।
आदिवासी परिवारों के लिए बड़ी राहत
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि कई बार बाजार में दाम गिरने से संग्राहकों को नुकसान होता है। इस पर मंत्री ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रणाली को और प्रभावी बनाया जाएगा ताकि आदिवासी परिवारों को स्थिर आय मिल सके।
सरकार यह भी विचार कर रही है कि MSP के तहत नई वनोपजों को शामिल किया जाए।
प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर चर्चा
वन मंत्री ने स्पष्ट कहा कि केवल संग्रहण के भरोसे वन अर्थव्यवस्था को मजबूत नहीं किया जा सकता।
उन्होंने बताया कि—
- प्रसंस्करण केंद्रों के जरिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे,
- महिलाओं के समूह आत्मनिर्भर बनेंगे,
- वनोपज उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलेगा।
उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में कई जिलों में वनोपज आधारित लघु उद्योग स्थापित किए जाएंगे।
पर्यावरण संरक्षण भी प्राथमिकता
मंत्री ने यह भी कहा कि लघु वनोपज का विकास तभी संभव है जब जंगल सुरक्षित रहें। इसलिए सामुदायिक वन प्रबंधन समितियों को मजबूत किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जल–संरक्षण, वृक्षारोपण और वन क्षेत्रों में आग रोकथाम जैसे उपायों पर भी स्थानीय समुदाय की भूमिका बढ़ाई जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री का जताया आभार
मुलाकात के बाद प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने वन मंत्री का आभार व्यक्त किया और कहा कि उनकी बातें गंभीरता से सुनने और आवश्यक सुधारों का आश्वासन देने से उन्हें उम्मीदें बढ़ी हैं।
उन्होंने कहा कि यह मुलाकात वन उत्पाद संग्राहकों और वन क्षेत्रों में कार्यरत समुदायों के लिए सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।
अगले चरण की तैयारियाँ
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रतिनिधिमंडल की मांगों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर आगामी बैठक में प्रस्तुत की जाए।
इसके साथ ही, वनोपज संग्रहण के लिए तकनीक–आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है।










