डॉ. चंदेल ने कहा कि खेल-कूद प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों की छिपी प्रतिभा उजागर करती हैं, आत्मविश्वास बढ़ाती हैं और नेतृत्व क्षमता तथा अनुशासन विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
रायपुर। छात्रों के सर्वांगीण विकास में खेल-कूद की भूमिका पर जोर देते हुए शिक्षा विशेषज्ञ और वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. चंदेल ने कहा कि खेल-कूद प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा को सामने लाने में अत्यंत मददगार होती हैं। रायपुर में आयोजित एक विद्यालयीन खेल सम्मेलन में उन्होंने विद्यार्थियों को खेलों में भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रेरित किया और शिक्षकों को भी खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की सलाह दी।
खेल से आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास
डॉ. चंदेल ने कहा कि खेल सिर्फ शारीरिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह जीवन कौशल का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
उन्होंने बताया कि—
- टीमवर्क,
- नेतृत्व,
- अनुशासन,
- निर्णय लेने की क्षमता
जैसी गुण खेलों के माध्यम से स्वाभाविक रूप से विकसित होते हैं।
उन्होंने कहा कि कई छात्र पढ़ाई में साधारण दिखते हैं, परन्तु खेल के मैदान में वे खुद को साबित करते हैं और आगे चलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना सकते हैं।
विद्यालयों में खेल आयोजन बढ़ाने की जरूरत
उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूलों में नियमित खेल प्रतियोगिताएँ आयोजित की जानी चाहिए ताकि बच्चों को अपने कौशल को निखारने के अवसर अधिक मिल सकें।
डॉ. चंदेल ने विशेष रूप से ग्रामीण और सरकारी स्कूलों में खेल सुविधाएँ बढ़ाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि खेल मैदान, उपकरण और प्रशिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी तो विद्यार्थियों में प्रतियोगिताओं के प्रति उत्साह भी बढ़ेगा।
मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव
डॉ. चंदेल ने बताया कि खेल विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है।
- तनाव कम करना,
- आत्म-संतुष्टि,
- एकाग्रता क्षमता में सुधार
जैसे लाभ खेलों के माध्यम से मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में बच्चों की शारीरिक गतिविधियाँ कम होती जा रही हैं, ऐसे में खेल-कूद कार्यक्रम संतुलित जीवनशैली वापस लाने में मदद करते हैं।
प्रतिभा पहचानने का मंच
उन्होंने बताया कि स्कूल स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताएँ कई बार छिपी हुई प्रतिभाओं को पहली बार मंच प्रदान करती हैं।
कई खिलाड़ी ऐसे ही स्कूल प्रतियोगिताओं से आगे बढ़कर जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि खेल विभाग, शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन मिलकर छात्र खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और सुविधाओं पर ज्यादा ध्यान दें।
अभिभावकों से अपील
डॉ. चंदेल ने अभिभावकों से भी कहा कि वे बच्चों पर केवल पढ़ाई का दबाव न डालें, बल्कि उन्हें खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करें।
उन्होंने कहा कि खेल में सक्रिय बच्चे अधिक अनुशासित, स्वस्थ और आत्मविश्वासी बनते हैं।
बालिकाओं की खेलों में बढ़ती सहभागिता
सम्मेलन में प्रस्तुत आंकड़ों में बताया गया कि हाल के वर्षों में बालिकाओं की खेलों में भागीदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है।
डॉ. चंदेल ने कहा कि यह सामाजिक बदलाव का सकारात्मक संकेत है और सभी स्कूलों को बालिकाओं के लिए सुरक्षित एवं प्रोत्साहित वातावरण तैयार करना चाहिए।
राज्य सरकार की योजनाएँ
कार्यक्रम में शिक्षा एवं खेल विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का भी उल्लेख किया गया।
- खेल अकादमियाँ,
- छात्रवृत्ति योजनाएँ,
- प्रशिक्षण केंद्र,
- खेल सामग्री वितरण
जैसी पहलों ने छात्र खिलाड़ियों को नई ऊर्जा प्रदान की है।
खेल शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका
डॉ. चंदेल ने कहा कि खेल प्रशिक्षक और शारीरिक शिक्षक विद्यार्थियों की खेल यात्रा में मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों में प्रशिक्षकों की संख्या और प्रशिक्षण स्तर दोनों में सुधार की आवश्यकता है।
उनके अनुसार, “एक अच्छे प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में विद्यार्थी अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं और अपने भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानते हैं।”






