LIVE बुधवार, 17 जून 2026
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छत्तीसगढ़

निजी स्कूलों का यू-टर्न: छत्तीसगढ़ में RTE प्रवेश आज से शुरू, आंदोलन खत्म

छत्तीसगढ़ के निजी स्कूलों ने शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत प्रवेश प्रक्रिया पर जारी अपने असहयोग आंदोलन को समाप्त करते हुए आज से दाखिले शुरू करने का बड़ा फैसला लिया है। इस निर्णय से राज्य के हजारों गरीब और वंचित छात्रों के लिए नए शैक्षणिक सत्र में निजी स्कूलों में प्रवेश का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जिससे अभिभावकों और शिक्षा विभाग को बड़ी राहत मिली है। यह फैसला लंबे समय से चल रहे गतिरोध को खत्म करता है, जिसके कारण आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया रुकी हुई थी।

क्या था असहयोग आंदोलन?

छत्तीसगढ़ के निजी स्कूल कई महीनों से राज्य सरकार के खिलाफ असहयोग आंदोलन चला रहे थे, जिसके मुख्य कारण आरटीई के तहत छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति में देरी और नए नियमों को लेकर उनकी आपत्तियां थीं। निजी स्कूलों का आरोप था कि सरकार उन्हें आरटीई के तहत पढ़ाए गए छात्रों की फीस का भुगतान समय पर नहीं करती, जिससे उन पर वित्तीय बोझ बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन सहित कई संगठनों ने इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाते हुए आरटीई प्रवेश प्रक्रिया में भाग लेने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि जब तक उनकी बकाया प्रतिपूर्ति का भुगतान नहीं होता और उनकी अन्य मांगों पर विचार नहीं किया जाता, तब तक वे प्रवेश नहीं लेंगे। इस आंदोलन के कारण हजारों सीटों पर दाखिले अधर में लटके हुए थे, और अभिभावकों में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही थी, खासकर जब नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने वाला था।

निजी स्कूलों का बड़ा फैसला और कारण

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लंबी खींचतान के बाद, निजी स्कूलों ने आखिरकार अपने असहयोग आंदोलन को वापस लेने और आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। यह फैसला विभिन्न हितधारकों, विशेषकर छात्रों के भविष्य को देखते हुए लिया गया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के एक प्रतिनिधि ने बताया कि सरकार के साथ कई दौर की बातचीत और आश्वासन के बाद यह सहमति बनी है कि उनकी लंबित मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि सभी बकाया राशि का भुगतान तुरंत किया जाएगा या नहीं। इस फैसले के पीछे छात्रों के अकादमिक वर्ष के नुकसान की बढ़ती आशंका भी एक प्रमुख कारण रही। शिक्षा विभाग ने भी स्कूलों से लगातार अपील की थी कि वे छात्रों के हित में प्रवेश प्रक्रिया जल्द शुरू करें। आज, 5 मई से आवेदन प्रक्रिया या प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है, जिससे अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला करवा सकेंगे। यह निर्णय एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है जो शिक्षा के अधिकार के मूल उद्देश्य को बनाए रखने में मदद करेगा।

छात्रों और अभिभावकों को राहत

निजी स्कूलों के इस फैसले से सबसे बड़ी राहत उन हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों को मिली है जो आरटीई प्रवेश का इंतजार कर रहे थे। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत, निजी स्कूलों में 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। इन सीटों पर प्रवेश से गरीब परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता है। आंदोलन के कारण प्रवेश प्रक्रिया में हुई देरी ने इन बच्चों के भविष्य को अनिश्चित बना दिया था, क्योंकि वे अन्य स्कूलों में भी दाखिला नहीं ले पा रहे थे। अब जब प्रवेश शुरू हो रहे हैं, तो अभिभावक अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को लेकर आश्वस्त महसूस कर रहे हैं। राज्य भर के लगभग 6000 निजी स्कूलों में आरटीई के तहत करीब 80,000 सीटों पर प्रवेश की उम्मीद है, जिससे एक बड़े वर्ग को फायदा होगा। पिछले कुछ हफ्तों से अभिभावक लगातार शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन से संपर्क कर रहे थे, ताकि उनके बच्चों का दाखिला सुनिश्चित हो सके और उन्हें किसी प्रकार की शैक्षिक क्षति न हो।

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आगे की राह और चुनौतियां

प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद, आगे की राह इतनी आसान नहीं है। सरकार और निजी स्कूलों के बीच लंबित वित्तीय मुद्दों का समाधान अभी भी बाकी है। शिक्षा विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्कूलों की बकाया फीस प्रतिपूर्ति समय पर की जाए ताकि भविष्य में ऐसे आंदोलनों की पुनरावृत्ति न हो और शिक्षा का माहौल सौहार्दपूर्ण बना रहे। इसके अलावा, प्रवेश प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करना भी एक चुनौती होगी, क्योंकि देरी के कारण अब कम समय में बड़ी संख्या में आवेदन और दाखिले पूरे करने होंगे। अभिभावकों को भी सलाह दी गई है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करें और स्कूल के दिशा-निर्देशों का पालन करें। सरकार को स्कूलों के साथ लगातार संवाद बनाए रखना होगा ताकि आरटीई अधिनियम के प्रावधानों का प्रभावी ढंग से पालन हो सके और सभी पात्र बच्चों को उनका अधिकार मिल सके। यह निर्णय केवल एक अस्थायी समाधान नहीं होना चाहिए, बल्कि दीर्घकालिक स्थिरता और सहयोग के लिए एक मंच तैयार करना चाहिए, जिससे छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार को सही मायने में साकार किया जा सके।

Dipti Das
लेखक / Author

दीप्ति दास दबंग आवाज़ की संवाददाता हैं, जो विभिन्न विषयों पर सटीक और संतुलित रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं।