रायगढ़ जिले की महिला स्व सहायता समूहों ने ‘रेडी-टू-ईट’ उत्पादन शुरू किया। यह पहल पोषण आहार उपलब्ध कराने के साथ महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त कर रही है।
रायपुर। आत्मनिर्भर भारत और महिला सशक्तिकरण की दिशा में छत्तीसगढ़ एक नया कदम उठा रहा है। रायगढ़ जिले की महिला स्व सहायता समूहों ने अब ‘रेडी-टू-ईट’ खाद्य उत्पादों का उत्पादन शुरू कर दिया है। यह पहल महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने के साथ-साथ पोषण आहार की उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी सहायक साबित हो रही है।
Read It Loud
स्व सहायता समूहों की पहल
रायगढ़ जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में सक्रिय महिला स्व सहायता समूहों ने राज्य सरकार और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से ‘रेडी-टू-ईट’ उत्पादन केंद्र शुरू किए हैं। इन केंद्रों में महिलाओं को आधुनिक तकनीकों से प्रशिक्षित किया गया है, ताकि वे गुणवत्तापूर्ण और पोषक तत्वों से भरपूर उत्पाद बना सकें।

पोषण और रोजगार का संगम
‘रेडी-टू-ईट’ उत्पादन का मुख्य उद्देश्य बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। साथ ही, यह महिलाओं को रोजगार और आय का साधन भी प्रदान कर रहा है। इस पहल से महिलाओं के आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है और वे अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को संभालने में सक्षम हो रही हैं।
मुख्यमंत्री की सराहना
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि महिला स्व सहायता समूहों का कार्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण का उदाहरण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में यह मॉडल पूरे राज्य में और भी व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।
स्थानीय स्तर पर लाभ
इन उत्पादन इकाइयों में तैयार किए जा रहे ‘रेडी-टू-ईट’ पैकेट आंगनबाड़ी केंद्रों और शैक्षणिक संस्थानों में भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे बच्चों को समय पर पौष्टिक आहार मिल रहा है और कुपोषण की समस्या से निपटने में मदद मिल रही है।
महिलाओं का उत्साह
स्व सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने बताया कि इस योजना ने उनके जीवन में बड़ा बदलाव किया है। पहले जहां उन्हें रोजगार की तलाश में बाहर जाना पड़ता था, अब वे गांव में रहकर ही सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं।
प्रशिक्षण और गुणवत्ता
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से महिलाओं को गुणवत्ता बनाए रखने और पोषण संतुलन पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इसके लिए नियमित निरीक्षण और परीक्षण की व्यवस्था भी की गई है।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
यह पहल न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि समाज में महिला सशक्तिकरण का संदेश भी दे रही है। स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और पोषण सुधार का यह संगम आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के विकास की एक नई कहानी लिखेगा।
भविष्य की योजना
राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस मॉडल को अन्य जिलों में भी विस्तार दिया जाएगा। साथ ही, महिलाओं को बाजार से जोड़ने और उनके उत्पादों की ब्रांडिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
निष्कर्ष
रायगढ़ जिले में महिला स्व सहायता समूहों द्वारा ‘रेडी-टू-ईट’ उत्पादन की यह पहल छत्तीसगढ़ में महिलाओं की ताकत और क्षमता का प्रतीक है। यह न केवल पोषण सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता की नींव भी मजबूत कर रहा है।







