मिड-डे मील खाने के बाद 25 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया, शिक्षा विभाग ने सावधानी बरतने का दावा किया।
रायपुर। राज्य में मध्याह्न भोजन योजना से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 25 बच्चों की तबीयत बिगड़ने और फूड प्वाइजनिंग के लक्षण सामने आने से प्रशासनिक और शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग से जवाब तलब किया, जिस पर विभाग ने बताया कि मिड-डे मील योजना के संचालन में सभी आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं।
घटना के बाद प्रभावित बच्चों को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार बच्चों में उल्टी, पेट दर्द और चक्कर जैसी शिकायतें पाई गई थीं।
कैसे सामने आया मामला
जानकारी के अनुसार, संबंधित स्कूल में बच्चों ने रोजाना की तरह मध्याह्न भोजन किया। भोजन के कुछ समय बाद कई बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी, जिसके बाद स्कूल प्रशासन ने तुरंत स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी। मौके पर पहुंची मेडिकल टीम ने बच्चों को उपचार उपलब्ध कराया।
हाईकोर्ट की सख्ती
मामले को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। कोर्ट ने पूछा कि मिड-डे मील की गुणवत्ता, साफ-सफाई और निगरानी व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
शिक्षा विभाग का पक्ष
हाईकोर्ट में जवाब पेश करते हुए शिक्षा विभाग ने कहा कि मिड-डे मील योजना के अंतर्गत भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय हैं। रसोइयों को नियमित प्रशिक्षण दिया जाता है और भोजन तैयार करने से लेकर परोसने तक स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
विभाग ने यह भी बताया कि भोजन के सैंपल सुरक्षित रखे जाते हैं और समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है। संबंधित घटना की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जांच के आदेश
प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के लिए समिति गठित की है। भोजन की सामग्री, पानी की गुणवत्ता और रसोई की स्थिति की जांच की जा रही है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
अभिभावकों में चिंता
घटना के बाद अभिभावकों में चिंता का माहौल है। उन्होंने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताते हुए मिड-डे मील की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। कई अभिभावकों ने नियमित निगरानी और पारदर्शिता की मांग की है।
मिड-डे मील योजना का महत्व
विशेषज्ञों का कहना है कि मिड-डे मील योजना बच्चों के पोषण और स्कूल उपस्थिति बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में इसकी गुणवत्ता और सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।
भविष्य में सख्ती के संकेत
हाईकोर्ट के संज्ञान के बाद यह माना जा रहा है कि मिड-डे मील योजना की निगरानी और सख्त की जाएगी। सरकार और प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
मामले ने एक बार फिर मिड-डे मील योजना में गुणवत्ता नियंत्रण की आवश्यकता को उजागर कर दिया है।










