LIVE बुधवार, 17 जून 2026
Advertisement Vastu Guruji
राज्य

ब्यास नदी उफान पर, पंडोह डैम से छोड़ा 3000 क्यूसेक पानी; 3 जिलों में अलर्ट

हिमाचल प्रदेश के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में तेजी से बर्फ पिघलने के कारण ब्यास नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, पंडोह डैम प्रबंधन ने एहतियातन 3000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी नदी में छोड़ दिया है, जिसके परिणामस्वरूप मंडी, कांगड़ा और हमीरपुर जिलों में प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। स्थानीय अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों और पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने तथा नदी के करीब न जाने की सख्त हिदायत दी है।

ब्यास नदी में जलस्तर की अप्रत्याशित वृद्धि

इस साल गर्मी की शुरुआत में ही तापमान में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके चलते पहाड़ों पर जमी बर्फ तेजी से पिघल रही है। यही कारण है कि ब्यास नदी में सामान्य से अधिक पानी आ रहा है, जिससे नदी अपने सामान्य प्रवाह से कहीं अधिक वेग से बह रही है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जो निचले इलाकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। ब्यास नदी हिमाचल प्रदेश की प्रमुख नदियों में से एक है और इसका उद्गम रोहतांग दर्रे के पास से होता है। यह नदी हिमाचल के कई महत्वपूर्ण शहरों जैसे कुल्लू, मंडी और हमीरपुर से होकर गुजरती है, और इसके किनारे घनी आबादी निवास करती है। जलस्तर में अचानक हुई यह वृद्धि स्थानीय निवासियों, पशुपालकों और पर्यटकों के लिए खतरा पैदा करती है, जो अक्सर नदी के सौंदर्य से आकर्षित होकर उसके करीब चले जाते हैं।

पंडोह बांध से पानी की निकासी और अलर्ट

ब्यास नदी पर स्थित पंडोह बांध, जो जलविद्युत परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है, में जलस्तर बढ़ने के बाद प्रबंधन ने सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त पानी छोड़ने का निर्णय लिया। 3000 क्यूसेक पानी की यह निकासी बांध पर दबाव कम करने और किसी भी संभावित खतरे को टालने के लिए की गई है। इस निकासी के तुरंत बाद मंडी, कांगड़ा और हमीरपुर जिलों के जिला प्रशासन ने अपने-अपने क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। इन जिलों के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने मछुआरों, रेत निकालने वाले श्रमिकों और नदी किनारे पिकनिक मनाने वालों को नदी के करीब न जाने की सख्त चेतावनी दी है। यह कदम किसी भी अप्रिय घटना से बचने और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

स्थानीय प्रशासन की अपील और एहतियाती कदम

स्थिति को नियंत्रण में रखने और किसी भी आपदा से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन ने कई एहतियाती कदम उठाए हैं। सभी संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है और आपातकालीन सेवाओं को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस और होमगार्ड के जवानों को नदी किनारे गश्त बढ़ाने के लिए कहा गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी व्यक्ति नदी के करीब न जाए। पंचायतों और स्थानीय निकायों के माध्यम से लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। लाउडस्पीकर के माध्यम से चेतावनी संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी अलर्ट जारी किए गए हैं। पर्यटकों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि वे अक्सर अनजाने में खतरनाक क्षेत्रों में चले जाते हैं। प्रशासन ने नदी किनारे अपने मवेशियों को चराने वाले पशुपालकों से भी विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

विज्ञापन
Advertisement

भविष्य की आशंकाएं और दीर्घकालिक समाधान

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस तरह की घटनाएं भविष्य में और अधिक बारंबार हो सकती हैं। उच्च तापमान के कारण पहाड़ों पर बर्फ पिघलने की दर तेज हुई है, जिससे नदियों में अचानक जलस्तर बढ़ने की समस्या उत्पन्न हो रही है। यह स्थिति न केवल मौजूदा मौसम में, बल्कि मानसून के आगमन पर भी बाढ़ का खतरा बढ़ा सकती है। ऐसे में, हिमाचल प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों को दीर्घकालिक समाधानों पर विचार करने की आवश्यकता है। इसमें बेहतर बाढ़ चेतावनी प्रणाली स्थापित करना, नदी किनारे की बस्तियों के लिए सुरक्षित निकासी योजनाएं बनाना और जल प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करना शामिल है। आपदा प्रबंधन टीमों को साल भर प्रशिक्षित और तैयार रखना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि ऐसी प्राकृतिक आपदाओं का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

Dipti Das
लेखक / Author

दीप्ति दास दबंग आवाज़ की संवाददाता हैं, जो विभिन्न विषयों पर सटीक और संतुलित रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं।