LIVE बुधवार, 17 जून 2026
Advertisement Vastu Guruji
छत्तीसगढ़

बैलाडीला खनन पर ग्रामीणों का हल्लाबोल: फर्जीवाड़ा-राजस्व हानि का आरोप

दंतेवाड़ा के बैलाडीला क्षेत्र में संचालित और प्रस्तावित खनन परियोजनाओं पर ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ग्रामीणों ने फर्जी ग्राम सभा, लोक सुनवाई और बिना वास्तविक खनन के कागजों में लौह अयस्क उत्पादन व परिवहन दिखाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे शासन को राजस्व और डीएमएफ मद में बड़े नुकसान की आशंका जताई जा रही है। इसी बीच, बस्तर की जीवनरेखा राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर स्थित केशकाल घाट में लगने वाले भीषण जाम से मुक्ति दिलाने के लिए 308 करोड़ रुपये की लागत से 11.38 किलोमीटर लंबा बायपास बनाने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।

बैलाडीला खनन पर गहराया विवाद

दंतेवाड़ा जिले में बैलाडीला की खनन गतिविधियाँ एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर डिपॉजिट क्रमांक-4 परियोजना में अनियमितताओं की शिकायत की है। यह आरोप लगाया गया है कि खनन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए फर्जी ग्राम सभा और लोक सुनवाई आयोजित की गई हैं, और स्थानीय लोगों की सहमति के बिना ही आवश्यक दस्तावेज तैयार कर लिए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी वास्तविक चिंताओं, जैसे रोजगार, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य सुविधाएँ और बुनियादी विकास, को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि सड़क निर्माण जैसी तैयारियाँ शुरू कर दी गई हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी ऐसी गतिविधि का विरोध करेंगे जो उनकी आजीविका और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाती हो।

फर्जी उत्पादन और राजस्व हानि का आरोप

ग्रामीणों ने आलनार स्थित आरती स्पंज एंड पावर लिमिटेड पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि कंपनी बिना किसी वास्तविक खनन गतिविधि के, केवल कागजों पर लौह अयस्क का उत्पादन और परिवहन दिखा रही है। मौके पर खदान क्षेत्र में न तो कोई मशीनें दिख रही हैं और न ही खनन के स्पष्ट चिन्ह मौजूद हैं, फिर भी कंपनी के रिकॉर्ड में भारी मात्रा में परिवहन दर्ज किया जा रहा है। ग्रामीणों की आशंका है कि इस तरह के फर्जीवाड़े से राज्य सरकार को राजस्व और जिला खनिज निधि (DMF) मद में भारी नुकसान हो रहा है, जिसका उपयोग क्षेत्र के विकास के लिए किया जाना चाहिए। यह स्थिति सरकार के लिए एक बड़ा वित्तीय और नैतिक प्रश्न खड़ा करती है, क्योंकि राजस्व का यह नुकसान अंततः उन विकास कार्यों को प्रभावित करेगा जिनसे स्थानीय समुदायों को लाभ मिलना चाहिए।

केशकाल घाट बायपास से मिलेगी जाम से मुक्ति

कोंडागांव जिले में स्थित केशकाल घाट, जिसे बस्तर की लाइफलाइन राष्ट्रीय राजमार्ग-30 का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, लंबे समय से यात्रियों के लिए जाम का सबब बना हुआ है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक बहुप्रतीक्षित परियोजना को अब गति मिली है। 308 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 11.38 किलोमीटर लंबे केशकाल घाट बायपास का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस बायपास के पूरा होने से न केवल घाटी में लगने वाले घंटों के जाम से मुक्ति मिलेगी, बल्कि बस्तर क्षेत्र में व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना क्षेत्र के आर्थिक विकास और आवागमन को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसमें दो बड़े पुलों का निर्माण भी शामिल है, जो यातायात को और अधिक सुचारू बनाएंगे और बरसात के मौसम में भी आवागमन को बाधित होने से बचाएंगे।

विज्ञापन
Advertisement

उच्च स्तरीय जाँच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने बैलाडीला में चल रही इन कथित अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के दोनों मामलों में उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जाँच की मांग की है। उन्होंने सैटेलाइट सत्यापन के माध्यम से खनन गतिविधियों की वास्तविकता की जाँच करने और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों या कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता और निष्पक्ष जाँच नहीं होती, तब तक वे अपना विरोध जारी रखेंगे। यह मामला खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और स्थानीय लोगों के अधिकारों के संरक्षण के महत्व को उजागर करता है, जहाँ विकास परियोजनाओं को स्थानीय समुदायों की सहमति और पर्यावरण नियमों के अनुरूप संचालित किया जाना चाहिए। प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वह ग्रामीणों के सरोकारों को संबोधित करे और सुनिश्चित करे कि विकास सतत और न्यायसंगत हो।

Dipti Das
लेखक / Author

दीप्ति दास दबंग आवाज़ की संवाददाता हैं, जो विभिन्न विषयों पर सटीक और संतुलित रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं।