कृषि उत्पादन आयुक्त ने राजनांदगांव जिले के ग्रामों का दौरा कर कृषि योजनाओं और फसल चक्र परिवर्तन की समीक्षा की तथा किसानों से संवाद कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
रायपुर। कृषि उत्पादन आयुक्त ने राजनांदगांव जिले के विभिन्न ग्रामों का दौरा कर कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन और फसल चक्र परिवर्तन की स्थिति का स्थल निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, उपलब्धियों और तकनीकी आवश्यकताओं को समझा तथा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
दौरे के दौरान कृषि उत्पादन आयुक्त ने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित कृषि योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने बीज वितरण, उर्वरक उपलब्धता, फसल बीमा, जैविक खेती, उद्यानिकी और सिंचाई सुविधाओं के बारे में विस्तृत जानकारी ली। साथ ही, फसल विविधिकरण और फसल चक्र परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया।
आयुक्त ने कहा कि एक ही फसल पर निर्भरता कम करने और मिट्टी की उर्वरकता बनाए रखने के लिए फसल चक्र परिवर्तन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों से दलहन, तिलहन, सब्जी और नकदी फसलों को अपनाने का आग्रह किया, ताकि आय के स्रोत बढ़ सकें और जोखिम भी कम हो।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभिन्न खेतों और प्रदर्शन प्लॉट्स का अवलोकन किया। कृषि वैज्ञानिकों और विस्तार अधिकारियों के साथ मिलकर उन्होंने उन्नत किस्मों, आधुनिक कृषि यंत्रों और सूक्ष्म सिंचाई तकनीक के उपयोग पर चर्चा की। आयुक्त ने कहा कि तकनीक आधारित खेती से उत्पादन बढ़ेगा और लागत में कमी आएगी।
किसानों ने भी अपनी बात रखते हुए मौसम, विपणन और लागत से जुड़ी चुनौतियों की जानकारी दी। आयुक्त ने भरोसा दिलाया कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन पूरी संवेदनशीलता से कार्य करेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों तक सही जानकारी समय पर पहुंचे और योजनाओं का लाभ उन्हें सरलता से मिले।
दौरे के दौरान प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों, ऋण वितरण और समर्थन मूल्य खरीद व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। आयुक्त ने कहा कि कृषि एक ऐसा क्षेत्र है, जो सीधे ग्रामीण आजीविका से जुड़ा है, इसलिए इसमें पारदर्शिता और संवेदनशीलता दोनों आवश्यक हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कृषि विभाग, उद्यानिकी, पशुपालन और सहकारिता विभाग मिलकर काम करें, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समग्र रूप से मजबूत किया जा सके। किसानों के लिए प्रशिक्षण, जागरूकता शिविर और फील्ड डेमोंस्ट्रेशन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।
आयुक्त ने अधिकारियों को समय-समय पर गांवों का दौरा कर फील्ड की वास्तविक स्थिति समझने और किसानों के संपर्क में रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर सक्रियता से ही योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव है।








