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छत्तीसगढ़

डबरी निर्माण से ग्रामीण आजीविका और जल संरक्षण को मिलेगा नया आधार

डबरी निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, सिंचाई और आजीविका को मजबूती मिल रही है, जिससे खेती, पशुपालन और मत्स्य पालन को नया सहारा प्राप्त हो रहा है।

रायपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और सिंचाई सुविधाओं को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा डबरियों (छोटे जल संरचनाओं) के निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। डबरी निर्माण से न केवल खेतों में सिंचाई की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण आजीविका, पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण को भी नया आधार मिलेगा।

डबरियां छोटे लेकिन प्रभावी जल संग्रहण साधन के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। वर्षा जल को संरक्षित कर इन्हें खेतों, चरागाहों और बाड़ी क्षेत्रों के पास बनाया जाता है, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए आसानी से पानी उपलब्ध हो सके। इससे सूखा प्रभावित और जल संकटग्रस्त क्षेत्रों में भी फसल उत्पादन बनाए रखना संभव होगा।

अधिकारियों के अनुसार, डबरी निर्माण से भूमिगत जल स्तर में भी सुधार होता है। जल का संचय होने से आसपास के क्षेत्रों में कुओं और ट्यूबवेल का जलस्तर स्थिर रहता है। इससे ग्रामीणों को पेयजल और घरेलू उपयोग के लिए भी पानी की उपलब्धता बढ़ती है।

डबरी योजना से किसानों को रबी और ग्रीष्मकालीन फसलों की खेती में बड़ी सुविधा मिल रही है। पहले जहां किसान केवल मानसून पर निर्भर रहते थे, वहीं अब वे सालभर खेती कर पा रहे हैं। इससे ग्रामीण आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।

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ग्रामीण आजीविका से जुड़े अन्य क्षेत्रों जैसे पशुपालन, मत्स्य पालन और बागवानी को भी डबरी निर्माण से लाभ मिल रहा है। पशुओं के लिए पानी की उपलब्धता आसान हुई है और कई स्थानों पर डबरियों में मत्स्य पालन भी शुरू किया गया है, जिससे अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।

डबरी निर्माण पर्यावरण संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे मिट्टी कटाव में कमी आती है, हरित आवरण बढ़ता है और सूक्ष्म जलवायु में सुधार होता है। गांवों में जल संकट से निपटने के लिए यह एक टिकाऊ और कम लागत वाला समाधान साबित हो रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि डबरी निर्माण के लिए ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। सामुदायिक डबरियों के साथ-साथ व्यक्तिगत किसानों को भी योजना का लाभ दिया जा रहा है। तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता के माध्यम से डबरी निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि डबरी निर्माण से उन्हें स्थायी जल स्रोत मिला है। अब वे अनुकूल समय पर सिंचाई कर पाते हैं और फसल नुकसान का जोखिम काफी हद तक कम हो गया है।

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक गांवों में डबरी निर्माण कर जल संरक्षण की स्थायी व्यवस्था विकसित की जाए। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती और किसानों को सुरक्षित खेती का भरोसा मिलेगा।



Heshma lahre
लेखक: Heshma lahre

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.