विधानसभा अध्यक्ष ने पूर्व मंत्री स्वर्गीय लीलाराम भोजवानी की पुण्यतिथि पर स्वागत द्वार का भूमिपूजन किया, जनसेवा और आदर्शों को याद कर दी प्रेरणा।
राजनांदगांव । प्रदेश की राजनीति और समाज सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले पूर्व मंत्री स्वर्गीय लीलाराम भोजवानी की पुण्यतिथि के अवसर पर एक भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष ने भोजवानी की स्मृति में बनाए जाने वाले स्वागत द्वार का भूमिपूजन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, स्थानीय नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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स्वर्गीय लीलाराम भोजवानी की स्मृति में आयोजन
स्वर्गीय भोजवानी का नाम छत्तीसगढ़ की राजनीति और जनसेवा के क्षेत्र में एक आदर्श के रूप में लिया जाता है। उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य उनके योगदान और आदर्शों को याद करना तथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देना था।
विधानसभा अध्यक्ष ने भूमिपूजन करते हुए कहा कि भोजवानी जी ने अपने जीवनकाल में सदैव जनहित को प्राथमिकता दी और समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने का काम किया। उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है और स्वागत द्वार उनकी स्मृति को जीवित रखने का माध्यम बनेगा।
कार्यक्रम की मुख्य झलकियाँ
- भूमिपूजन का आयोजन धार्मिक रीति-रिवाजों और मंत्रोच्चारण के बीच सम्पन्न हुआ।
- स्थानीय लोगों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर भोजवानी के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
- अतिथियों ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि वे एक ऐसे नेता थे जो हमेशा जनता के बीच रहते थे और उनकी समस्याओं का समाधान करते थे।
जनसेवा और योगदान की चर्चा
समारोह में वक्ताओं ने भोजवानी जी के कार्यकाल की यादें ताजा करते हुए कहा कि वे हमेशा ईमानदारी, सादगी और सेवा भावना के लिए जाने जाते थे। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और सामाजिक उत्थान के लिए अनेक कार्य किए।
विशेषकर गरीब और वंचित वर्गों के उत्थान में उनकी नीतियों और प्रयासों को आज भी लोग याद करते हैं। यही कारण है कि उनकी पुण्यतिथि पर स्थानीय लोग हर वर्ष उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने एकजुट होते हैं।
विधानसभा अध्यक्ष का संबोधन
अपने संबोधन में विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि स्वागत द्वार का निर्माण केवल एक भौतिक संरचना नहीं है, बल्कि यह एक प्रतीक है – जो आने वाली पीढ़ियों को याद दिलाएगा कि राजनीति केवल सत्ता पाने का साधन नहीं बल्कि जनसेवा का मार्ग है।
उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ की राजनीति को लीलाराम भोजवानी जैसे समर्पित और कर्मठ नेताओं से हमेशा प्रेरणा मिलती रहेगी।
श्रद्धांजलि और संकल्प
आयोजन में शामिल लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कई वक्ताओं ने यह भी कहा कि भोजवानी की सोच और कार्यशैली आज भी प्रासंगिक है।
इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने यह संकल्प लिया कि वे भोजवानी जी के दिखाए रास्ते पर चलते हुए समाज की सेवा करेंगे और उनकी स्मृति को सदा जीवित रखेंगे।
सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
स्वागत द्वार का निर्माण केवल श्रद्धांजलि ही नहीं बल्कि स्थानीय संस्कृति और गौरव का प्रतीक होगा। आने वाले समय में यह द्वार न केवल शहर की पहचान बनेगा बल्कि युवाओं को भी प्रेरित करेगा कि वे समाज और राष्ट्र के लिए कुछ करें।
निष्कर्ष
स्वर्गीय लीलाराम भोजवानी की पुण्यतिथि पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक सम्मान समारोह नहीं था बल्कि समाज को यह संदेश देने वाला आयोजन था कि सच्चे नेता वही हैं जो जनता के लिए जीते हैं और जनता के लिए ही कार्य करते हैं।






