रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आगामी 12 और 13 सितंबर को भारत में आयोजित होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली आएंगे। क्रेमलिन ने आधिकारिक तौर पर इस महत्वपूर्ण दौरे की पुष्टि कर दी है, जिससे भारत और रूस के बीच उच्च-स्तरीय कूटनीतिक संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह एक साल के भीतर पुतिन का दूसरा भारत दौरा होगा, जो दोनों देशों के बीच लगातार गहरे होते रणनीतिक सहयोग का प्रतीक है और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।
सितंबर में होगा BRICS शिखर सम्मेलन
भारत इस साल BRICS समूह की अध्यक्षता कर रहा है, और इसी के तहत 12 तथा 13 सितंबर को राजधानी दिल्ली में इस महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। BRICS उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। यह समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और दुनिया की आबादी के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। भारत ने इस साल 13 जनवरी 2026 को BRICS की अध्यक्षता संभाली थी। इसके तुरंत बाद, 14 जनवरी के आसपास, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस समिट से जुड़े आधिकारिक थीम, लोगो और वेबसाइट का शुभारंभ किया था, जिससे सम्मेलन की तैयारियों को गति मिली थी। इस शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के प्रमुख वैश्विक मुद्दों, आर्थिक सहयोग, व्यापार और विकास पर चर्चा करेंगे, साथ ही वर्तमान अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
पुतिन का दूसरा भारत दौरा और संबंध
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का यह दौरा एक साल के भीतर भारत का उनका दूसरा दौरा होगा, जो दोनों देशों के बीच मजबूत और निरंतर उच्च-स्तरीय संपर्कों को दर्शाता है। इससे पहले, पुतिन पिछले साल दिसंबर 2025 में 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आए थे। उस दो दिवसीय दौरे के दौरान, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी और रक्षा, ऊर्जा, व्यापार तथा वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की थी। इन उच्च-स्तरीय वार्ताओं ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम दिया है और पारस्परिक हितों को आगे बढ़ाने में मदद की है। पुतिन की यह आगामी यात्रा रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के हालिया भारत दौरे के कुछ ही दिनों बाद हो रही है, जो BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए भारत आए थे। यह लगातार आदान-प्रदान भारत और रूस के बीच मजबूत कूटनीतिक तालमेल और साझा रणनीतिक लक्ष्यों का स्पष्ट संकेत है।
भारत की अध्यक्षता और कूटनीतिक महत्व
भारत के लिए BRICS की अध्यक्षता करना और इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी करना कूटनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह भारत को वैश्विक मंच पर अपनी नेतृत्व क्षमता प्रदर्शित करने और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करता है। भारत इस मंच का उपयोग सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, डिजिटल नवाचार, स्वास्थ्य सेवा और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए करेगा। BRICS देश वैश्विक जीडीपी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा और दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे उनके निर्णय और सहयोग का वैश्विक प्रभाव होता है। पुतिन जैसे प्रमुख वैश्विक नेता की उपस्थिति इस सम्मेलन की महत्ता को और बढ़ाएगी और विभिन्न द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय वार्ताओं के लिए मंच प्रदान करेगी। भारत इस अवसर का उपयोग करके अपनी विदेश नीति के लक्ष्यों को आगे बढ़ाएगा और वैश्विक चुनौतियों के लिए साझा समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बदलते वैश्विक परिवेश में रूस की भूमिका
वर्तमान बदलते वैश्विक परिवेश में भारत के लिए रूस के साथ संबंध अत्यंत अहम हैं। भू-राजनीतिक चुनौतियों और नए गठबंधनों के दौर में, रूस भारत के लिए एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक रणनीतिक भागीदार रहा है। रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में रूस भारत का एक प्रमुख सहयोगी बना हुआ है। रूस से तेल और गैस की आपूर्ति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि रूसी सैन्य उपकरण भारतीय सेना के आधुनिकीकरण में अहम भूमिका निभाते हैं। BRICS जैसे मंच पर रूस की सक्रिय भागीदारी भारत को वैश्विक मुद्दों पर एक संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखने में मदद करती है। पुतिन की यह यात्रा दोनों देशों को वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों पर विचारों का आदान-प्रदान करने और साझा हितों को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगी, जिससे दोनों देशों के बीच संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकेगा। यह दौरा दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के साथ-साथ वैश्विक स्थिरता में भी योगदान देगा।










