संसद से पारित पेपर लीक रोकथाम विधेयक-2026 का विकास ठाकुर ने स्वागत किया, कहा नया कानून युवाओं, विद्यार्थियों और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
रायपुर/खरोरा। भाजपा पंचायत प्रकोष्ठ छत्तीसगढ़ के मीडिया प्रभारी विकास सिंह ठाकुर ने संसद के दोनों सदनों से पारित पेपर लीक रोकथाम विधेयक-2026 का स्वागत करते हुए इसे देश के करोड़ों युवाओं, विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के हित में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी निर्णय बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी, पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तथा केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
विकास ठाकुर ने कहा कि देश का युवा वर्ग राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थी वर्षों तक कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के साथ अपने भविष्य के लिए मेहनत करते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत, प्रतिभा और सपनों पर सीधा प्रहार करती हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय पेपर लीक गिरोहों और नकल माफियाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित करने का प्रयास किया, जिसके कारण कठोर कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने युवाओं की भावनाओं और उनकी समस्याओं को गंभीरता से समझते हुए यह महत्वपूर्ण कानून लागू किया है। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाना है। उन्होंने नागरिकों से इस कानून का स्वागत करने की अपील करते हुए कहा कि यह स्पष्ट संदेश है कि देश में अब प्रतिभा और परिश्रम का सम्मान होगा तथा पेपर लीक, नकल और परीक्षा माफियाओं के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा।
हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेष रूप से नीट परीक्षा से जुड़े विवादों के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से यह विधेयक प्रस्तुत किया था, जिसे संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिल चुकी है। नए कानून में प्रश्नपत्र या उत्तर कुंजी लीक करना, नकल कराना, परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी हस्तक्षेप करना, डिजिटल माध्यमों से परीक्षा प्रभावित करना तथा संगठित नेटवर्क के माध्यम से परीक्षा में गड़बड़ी करने जैसे अपराधों के लिए पहले से अधिक कठोर दंड का प्रावधान किया गया है।
विधेयक के तहत दोषियों के लिए लंबी अवधि के कारावास, भारी आर्थिक दंड, संगठित गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, परीक्षा संचालन एजेंसियों और संस्थानों की लापरवाही या मिलीभगत पर दंडात्मक प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। साथ ही पेपर लीक मामलों की समयबद्ध जांच, विशेष जांच तंत्र और त्वरित न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है, ताकि दोषियों को शीघ्र सजा मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
विकास ठाकुर ने विश्वास जताया कि यह कानून देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाएगा, युवाओं का विश्वास मजबूत करेगा और ईमानदार अभ्यर्थियों को निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।




