रायपुर के होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी को ब्रिटिश संसद में अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिला और उन्होंने ऑक्सफोर्ड में स्किन डिजीज विषय पर व्याख्यान दिया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के प्रतिष्ठित होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी को ब्रिटिश पार्लियामेंट में आयोजित एक भव्य समारोह में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें World Homeopathy Summit 4 के अवसर पर होम्योपैथी के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया।

ब्रिटिश संसद में आयोजित इस कार्यक्रम में भारत सहित विभिन्न देशों के प्रतिष्ठित होम्योपैथिक चिकित्सक शामिल हुए। समारोह में रायपुर, छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न स्थानों के लगभग 100 होम्योपैथी चिकित्सकों और विदेशों से आए 25 चिकित्सकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
ऑक्सफोर्ड में दिया विशेष व्याख्यान
डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी ने इस अवसर पर ऑक्सफोर्ड में स्किन डिजीज (त्वचा रोग) विषय पर विशेष व्याख्यान भी दिया। उनके व्याख्यान में होम्योपैथी के माध्यम से त्वचा रोगों के उपचार और शोध से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई। उनके विचारों और अनुभवों को उपस्थित चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने काफी सराहा।
डॉ. त्रिवेदी की इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ के लिए भी गौरव का विषय माना जा रहा है। उनके अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मानित होने से प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र को नई पहचान मिली है।
कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियां रहीं मौजूद
इस गरिमामय समारोह में ब्रिटिश संसद के सदस्य लॉर्ड रावल और शिवानी राजा विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एलिस्टर कुक, इयोन मॉर्गन, स्टुअर्ट ब्रॉड, जोनाथन ट्रॉट और डेविड ग्रोवर जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त व्यक्तित्व भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
प्रसिद्ध होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. नीतीश चंद्र दुबे की उपस्थिति ने भी कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न देशों से आए चिकित्सकों ने होम्योपैथी के क्षेत्र में हो रहे शोध और उपचार पद्धतियों पर अपने अनुभव साझा किए।
छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण
डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी को मिला यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान छत्तीसगढ़ और भारत के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उनकी उपलब्धि पर खुशी जताई और इसे होम्योपैथी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय चिकित्सकों की भागीदारी और सम्मान से वैश्विक स्तर पर भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की पहचान और मजबूत होती है।






