मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की प्राथमिकता वन्य प्राणियों का संरक्षण और संवर्धन है, जिससे पर्यावरण संतुलन और सतत विकास संभव होगा।
रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता वन्य प्राणियों का संरक्षण और संवर्धन है। प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता, राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और बाघ परियोजनाएं न केवल राज्य की पहचान हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए धरोहर भी हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इन धरोहरों को संरक्षित रखते हुए पर्यावरण संतुलन और सतत विकास सुनिश्चित किया जाए।

जैव विविधता की धरोहर
छत्तीसगढ़ को “भारत का हरा-भरा दिल” कहा जाता है। यहां के घने वन, नदियां और पहाड़ वन्य जीवों के लिए आदर्श आवास हैं। बाघ, तेंदुआ, हाथी, जंगली भैंसा और दुर्लभ पक्षियों की प्रजातियां इस राज्य की पहचान हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रजातियों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक पद्धति, आधुनिक तकनीक और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा दिया जाएगा।
सरकार की पहल
वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इनमें शामिल हैं:
- राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना।
- वन्य जीव अपराधों पर कठोर कार्रवाई।
- आधुनिक तकनीक से वन्य जीवों की गणना और निगरानी।
- स्थानीय समुदायों को संरक्षण कार्यक्रमों से जोड़ना।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन प्रयासों से न केवल वन्य जीवों की संख्या में बढ़ोतरी होगी, बल्कि इको-टूरिज्म और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
हाथी संरक्षण पर विशेष ध्यान
छत्तीसगढ़ के जंगलों में हाथियों की बड़ी आबादी है। हाल के वर्षों में मानव-हाथी संघर्ष एक गंभीर चुनौती के रूप में सामने आया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस समस्या को सुलझाने के लिए वैज्ञानिक और व्यवहारिक समाधान तलाश रही है। इसके लिए हाथियों के कॉरिडोर सुरक्षित करने और चेतावनी तंत्र विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है।
बाघ और अन्य दुर्लभ प्रजातियों पर फोकस
बाघ संरक्षण के लिए प्रदेश में विशेष परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इंद्रावती और अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही दुर्लभ पक्षियों और अन्य संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी योजनाएं बनाई गई हैं।
सामुदायिक सहभागिता की भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्य जीव संरक्षण केवल सरकार का काम नहीं, बल्कि इसमें समाज की भी सक्रिय भूमिका होनी चाहिए। ग्रामीण और जनजातीय समुदाय, जो जंगलों से प्रत्यक्ष जुड़े हैं, उन्हें जागरूक कर इस मिशन में भागीदार बनाया जाएगा।
शिक्षा और जागरूकता अभियान
वन्य जीव संरक्षण को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार ने शिक्षा और जागरूकता पर भी जोर दिया है। स्कूलों और कॉलेजों में विशेष कार्यक्रम चलाकर बच्चों और युवाओं को प्रकृति और पर्यावरण के महत्व के बारे में बताया जाएगा।
भविष्य की योजनाएं
सरकार आने वाले वर्षों में वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए अधिक संरक्षित क्षेत्र विकसित करने, रिसर्च सेंटर खोलने और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने पर काम करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि “हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ को वन्य प्राणियों के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन का मॉडल राज्य बनाया जाए।”
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का यह बयान स्पष्ट करता है कि छत्तीसगढ़ सरकार वन्य जीव संरक्षण और संवर्धन को लेकर गंभीर और प्रतिबद्ध है। यह न केवल प्राकृतिक धरोहरों को सुरक्षित करेगा बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास में भी सहायक होगा।






