महानदी तट पर आयोजित दिव्य आरती में दीपों, मंत्रोच्चार और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक शांति और अनुपम भक्ति का अनुभव किया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा कही जाने वाली महानदी के पावन तट पर आयोजित दिव्य आरती ने श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। सैकड़ों दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार और भक्तिमय वातावरण ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना का भी प्रतीक बना।
दीपों की रोशनी में नहाया महानदी तट
सांझ ढलते ही महानदी तट पर आरती की तैयारियां शुरू हो गईं। जैसे ही आरती प्रारंभ हुई, दीपों की कतारों से पूरा तट जगमगा उठा। पुजारियों द्वारा विधिवत मंत्रोच्चार और शंखनाद के साथ आरती संपन्न की गई। इस दौरान “हर-हर गंगे” और भक्ति गीतों से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
दिव्य आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आए भक्तों ने भी इस अलौकिक अनुभव का साक्षी बनने के लिए महानदी तट का रुख किया। परिवारों के साथ पहुंचे श्रद्धालुओं ने मां महानदी की आराधना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
आयोजकों ने बताया कि महानदी केवल एक नदी नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान है। इस प्रकार के आयोजन लोगों को अपनी परंपराओं और आस्था से जोड़ने का कार्य करते हैं। आरती के माध्यम से नदी संरक्षण और स्वच्छता का संदेश भी दिया गया।
भक्ति के साथ पर्यावरण का संदेश
दिव्य आरती के दौरान यह संदेश दिया गया कि नदियों की पूजा के साथ-साथ उनका संरक्षण भी हमारी जिम्मेदारी है। श्रद्धालुओं से अपील की गई कि वे नदियों को स्वच्छ रखें और प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करें।
भावविभोर हुए श्रद्धालु
आरती के समापन के बाद श्रद्धालुओं ने दीपदान किया और महानदी को नमन किया। कई लोगों ने इसे जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया। भक्तों का कहना था कि महानदी तट पर की गई यह आरती मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है।
स्थानीय प्रशासन और आयोजन समिति की ओर से व्यवस्थाएं सुचारू रहीं। सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात के विशेष इंतजाम किए गए थे, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सफल रहा।










