रायपुर में विजयादशमी पर राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि दशहरा केवल रावण दहन नहीं, बल्कि जीवन में अच्छाई अपनाने और बुराई त्यागने का संदेश है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में विजयादशमी का पर्व उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित मुख्य समारोह में राज्यपाल श्री डेका ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि दशहरा केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को सही दिशा देने वाला संदेश भी है।
उन्होंने कहा कि इस पर्व का वास्तविक अर्थ अच्छाई को अपनाना और बुराई का त्याग करना है। रावण दहन महज एक परंपरा नहीं, बल्कि यह आत्मविश्लेषण का अवसर है जिसमें हम अपने भीतर मौजूद नकारात्मकता और बुराइयों को खत्म करने का संकल्प लेते हैं।
रावण दहन कार्यक्रम में उमड़ी भीड़
राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में भव्य रावण दहन कार्यक्रम आयोजित हुए। जगह-जगह रामलीला मंचन, झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं। रायपुर के तेलीबांधा मैदान, भाठागांव और अन्य प्रमुख स्थलों पर रावण दहन देखने के लिए हजारों लोग जुटे।
राज्यपाल श्री डेका ने कार्यक्रम में शामिल होकर लोगों को दशहरे की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें यह याद दिलाता है कि असत्य, अन्याय और अधर्म का अंत निश्चित है, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो।
राज्यपाल का संबोधन
अपने उद्बोधन में राज्यपाल श्री डेका ने कहा –
“दशहरा केवल बुराई के प्रतीक रावण को जलाने का दिन नहीं, बल्कि अपने जीवन की बुराइयों को त्यागकर अच्छाई, सत्य और नैतिक मूल्यों को अपनाने का पर्व है।”
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे विजयादशमी को एक प्रेरणा के रूप में लें और शिक्षा, अनुशासन और सेवा भावना के जरिए समाज को सशक्त बनाएं।
राज्यपाल ने कहा कि आज समाज को भ्रष्टाचार, हिंसा, नशाखोरी और पर्यावरण प्रदूषण जैसी बुराइयों से लड़ने की जरूरत है। जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया, उसी प्रकार हमें इन सामाजिक बुराइयों का अंत करने के लिए एकजुट होना चाहिए।
सांस्कृतिक रंग में रंगा छत्तीसगढ़
पूरे छत्तीसगढ़ में दशहरा उत्सव का उल्लास देखने को मिला। गांवों और कस्बों में रामलीला मंचन हुआ, बच्चों ने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य और नाटक प्रस्तुत किए।
मेले में हस्तशिल्प, खिलौने, मिठाइयां और झूले आकर्षण का केंद्र बने। परिवारों ने इस उत्सव का भरपूर आनंद लिया।
प्रशासन की तैयारियां
दशहरा पर्व को देखते हुए रायपुर जिला प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे। पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ ही यातायात व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया। स्वास्थ्य विभाग ने इमरजेंसी सेवाओं की व्यवस्था की ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
विजयादशमी का सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व
राज्यपाल ने कहा कि विजयादशमी हमें यह सिखाती है कि व्यक्तिगत जीवन में भी अनुशासन, ईमानदारी और नैतिकता का पालन जरूरी है। यदि हर व्यक्ति अपने भीतर की बुराइयों को खत्म करने का प्रयास करे, तो समाज और देश स्वतः ही प्रगति की राह पर आगे बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि यह पर्व केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार और नैतिक उत्थान का प्रतीक है।
नागरिकों की भागीदारी और संदेश
रायपुर सहित पूरे प्रदेश में लोगों ने दशहरे के अवसर पर उत्साहपूर्वक भाग लिया। कई नागरिकों ने कहा कि जब राज्यपाल जैसे उच्च पदस्थ व्यक्ति समाज को जीवन से जुड़े संदेश देते हैं, तो वह आम जनता के लिए प्रेरणा बन जाता है।
निष्कर्ष
रायपुर में विजयादशमी पर राज्यपाल श्री डेका का संदेश इस पर्व के गहरे आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व को उजागर करता है। उन्होंने साफ कहा कि दशहरा केवल रावण दहन का पर्व नहीं, बल्कि जीवन में अच्छाई को अपनाने और बुराई को त्यागने की सीख है। यह पर्व हमें हर वर्ष यह याद दिलाता है कि धर्म और सत्य की शक्ति सबसे बड़ी है और बुराई का अंत निश्चित है।











