केरल में मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के नेतृत्व में नई UDF सरकार ने सत्ता में वापसी के साथ ही अपनी पहली कैबिनेट बैठक में कई बड़े और जन-हितैषी फैसले लिए हैं। दस साल बाद सत्ता में आई इस सरकार ने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, आशा और आंगनवाड़ी कर्मचारियों के मानदेय में बढ़ोतरी, और वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक अलग विभाग के गठन जैसे महत्वपूर्ण ऐलान कर अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। ये निर्णय राज्य भर में नागरिकों को सीधे लाभ पहुँचाने और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किए गए हैं, जो सरकार की कल्याणकारी नीतियों की शुरुआती झलक पेश करते हैं।
जन-हितैषी फैसलों की झड़ी
नई UDF सरकार ने शपथ ग्रहण के तुरंत बाद ही जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। कैबिनेट की बैठक में सबसे प्रमुख घोषणाओं में से एक 15 जून से महिलाओं के लिए KSRTC बसों में मुफ्त यात्रा सुविधा की शुरुआत है। यह कदम महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और सार्वजनिक परिवहन तक उनकी पहुँच सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके साथ ही, राज्य की स्वास्थ्य और बाल विकास सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए भी अहम फैसले लिए गए। आशा कार्यकर्ताओं के मासिक मानदेय में 3000 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जबकि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और उनके सहयोगी कर्मचारियों के मानदेय में 1000 रुपये मासिक वृद्धि का निर्णय लिया गया है। यह बढ़ोतरी इन जमीनी स्तर के कर्मचारियों के अथक प्रयासों को मान्यता देती है और उनके जीवन स्तर को सुधारने में मदद करेगी।
सामाजिक सुरक्षा और सम्मान

सरकार ने सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण पहल की है, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक अलग विभाग के गठन का ऐलान किया गया है। मुख्यमंत्री सतीशन ने इस फैसले को केरल को “सम्मानजनक बुजुर्ग देखभाल वाला आदर्श समाज” बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। यह विभाग वरिष्ठ नागरिकों की विशेष ज़रूरतों, उनके कल्याण और उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए समर्पित होगा, जो बढ़ती उम्र की आबादी के लिए एक महत्वपूर्ण सहायता प्रणाली प्रदान करेगा। यह दर्शाता है कि नई सरकार समाज के हर वर्ग के कल्याण के प्रति गंभीर है और बुजुर्गों की देखभाल को प्राथमिकता दे रही है।
प्रशासनिक नियुक्तियाँ और पारदर्शिता
पहली कैबिनेट बैठक में कुछ महत्वपूर्ण प्रशासनिक नियुक्तियाँ भी की गईं। वरिष्ठ विधायक जी सुधाकरन को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया गया है, जो विधानसभा सत्र के सुचारु संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा, वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव बाबू को राज्य का एडवोकेट जनरल और टीएस आसफ अली को अभियोजन महानिदेशक बनाया गया है। ये नियुक्तियाँ राज्य के कानूनी और न्यायिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में सरकार के शुरुआती प्रयास हैं। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए, सरकार ने जल्द ही राज्य की वित्तीय स्थिति पर एक श्वेत पत्र जारी करने की भी घोषणा की है। यह कदम जनता को राज्य की वास्तविक आर्थिक स्थिति से अवगत कराएगा और भविष्य की वित्तीय नीतियों के लिए आधार तैयार करेगा।
राजनीतिक मामलों पर सख्ती
सरकार ने राजनीतिक हिंसा के मामलों पर भी अपनी सख्त रुख अपनाया है। अलाप्पुझा में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हुए कथित हमले के मामले की दोबारा जाँच के लिए एक विशेष जाँच दल (SIT) गठित करने का फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय अदालत के निर्देशों के अनुपालन में किया जा रहा है, जो कानून के शासन को बनाए रखने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, राज्य लोकपाल, राज्य चुनाव आयोग और पीएससी नियुक्तियों जैसे महत्वपूर्ण संस्थागत मामलों को लेकर भी सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता जताई है, यह संकेत देते हुए कि इन क्षेत्रों में भी सुधार और पारदर्शिता लाने की दिशा में काम किया जाएगा। ये सभी फैसले नई UDF सरकार की एक मजबूत और जन-केंद्रित प्रशासन प्रदान करने की इच्छा को दर्शाते हैं।










