वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि वन उत्पादों के व्यापार को बढ़ावा देकर ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा है कि राज्य में वन उत्पादों के व्यापार को प्रोत्साहन देकर ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था को सशक्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ वनों से समृद्ध राज्य है और यहां के लघु वनोपज ग्रामीण व आदिवासी समुदायों की आजीविका का प्रमुख आधार हैं।
रायपुर में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि वन आधारित उत्पादों को उचित बाजार, बेहतर मूल्य और प्रसंस्करण की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इससे वनों पर निर्भर समुदायों की आय में स्थायी वृद्धि होगी।
वन मंत्री ने कहा कि महुआ, इमली, तेंदूपत्ता, हर्रा, बहेरा, चिरौंजी, लाख और शहद जैसे वनोपज के संग्रह, प्रसंस्करण और विपणन को संगठित किया जा रहा है। इससे कच्चे माल के बजाय मूल्य संवर्धित उत्पाद बाजार में पहुंचेंगे और ग्रामीणों को अधिक लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि वन धन विकास केंद्रों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण और आदिवासी परिवारों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बाजार से जोड़ा जा रहा है। इससे महिलाओं और युवाओं को भी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि वन उत्पादों के व्यापार को बढ़ावा देने से न केवल आर्थिक लाभ होगा, बल्कि वनों के संरक्षण में भी मदद मिलेगी। जब समुदायों को वनों से सतत आय मिलेगी, तो वे वनों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा वनोपज की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा रहा है, ताकि संग्रहकर्ताओं को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी।
बैठक में यह भी बताया गया कि वन उत्पादों के लिए ब्रांडिंग, पैकेजिंग और ऑनलाइन मार्केटिंग पर ध्यान दिया जा रहा है। राज्य स्तर पर और राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
वन मंत्री ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में वन आधारित लघु उद्योगों की स्थापना से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा और पलायन की समस्या कम होगी। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में वन उत्पादों के व्यापार को व्यवस्थित रूप देने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। यह मॉडल अन्य वन बहुल राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
अपने संबोधन के अंत में वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि वन, ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। सरकार का लक्ष्य है कि वन उत्पादों के माध्यम से गांवों में समृद्धि लाई जाए और आदिवासी समाज को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए।










