रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में अब वन उत्पादों के बेहतर उपयोग और नवाचार की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। “बस्तर का वेस्ट-अब बनेगा बेस्ट” अभियान के तहत छिंद के बीजों से कैफीन मुक्त हर्बल कॉफी तैयार करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इस पहल से न केवल वन संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि स्थानीय लोगों और स्व-सहायता समूहों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा होंगे।
जानकारी के अनुसार, बस्तर में बड़ी मात्रा में पाए जाने वाले छिंद के पेड़ों के बीजों का अब तक सीमित उपयोग होता था। कई बार ये बीज अनुपयोगी समझकर फेंक दिए जाते थे। अब इन्हीं बीजों को प्रोसेस कर हर्बल कॉफी तैयार की जाएगी, जो पूरी तरह कैफीन मुक्त होगी और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान समय में लोग स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं और हर्बल तथा प्राकृतिक पेय पदार्थों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में छिंद बीजों से तैयार होने वाली यह हर्बल कॉफी बाजार में नई पहचान बना सकती है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है।
अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना में स्थानीय स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं को भी जोड़ा जा रहा है। उन्हें बीज संग्रहण, प्रसंस्करण और पैकेजिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन सकेंगी।
बस्तर क्षेत्र वन संपदा और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां के कई वन उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। अब छिंद बीजों से बनने वाली हर्बल कॉफी भी बस्तर को नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस उत्पाद में एंटीऑक्सीडेंट और अन्य पोषक तत्व पाए जाने की संभावना है, जिससे यह स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में लोकप्रिय हो सकता है। इसके साथ ही यह स्थानीय किसानों और वनवासियों की आय बढ़ाने में भी मददगार साबित होगा।
स्थानीय लोगों ने इस पहल का स्वागत किया है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले जिन बीजों का कोई विशेष उपयोग नहीं होता था, अब वही उनकी आय का स्रोत बन सकते हैं। इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
राज्य सरकार और संबंधित विभाग वन आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। “बस्तर का वेस्ट-अब बनेगा बेस्ट” अभियान को भी आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
आने वाले समय में यदि यह परियोजना सफल होती है, तो बस्तर की हर्बल कॉफी राष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकती है और स्थानीय उत्पादों को नए अवसर मिल सकते हैं।










