तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे कई लोगों के लिए एक बड़ा आश्चर्य लेकर आए, जब अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कज़गम (TVK) राज्य में सबसे बड़ी एकल पार्टी बनकर उभरी। हालांकि, 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में 118 सीटों के बहुमत के आंकड़े से उनकी पार्टी चूक गई, जिसने 107 सीटें जीतीं। 2024 में गठित इस पार्टी के उदय ने राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय खोल दिया है। सत्तारूढ़ DMK गठबंधन 74 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि NDA 53 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर खिसक गया। इन तीनों प्रमुख दलों के अलावा किसी अन्य दल को एक भी सीट नहीं मिली, जिससे राज्य में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बन गई है और सरकार गठन को लेकर अनिश्चितता का माहौल है।
त्रिशंकु विधानसभा का गणित
तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है, लेकिन किसी भी पार्टी या गठबंधन को यह जादुई आंकड़ा नहीं मिला। विजय की TVK ने अकेले दम पर चुनाव लड़ा और 107 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया, जो बहुमत से केवल 11 सीटें कम हैं। वहीं, पारंपरिक रूप से राज्य की राजनीति पर हावी रहने वाले दो धुरंधर दल, DMK और AIADMK (जो NDA का हिस्सा है), इस बार उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए। DMK के नेतृत्व वाले गठबंधन को 74 सीटें मिलीं, जिसमें DMK की अपनी सीटें 60 हैं। NDA को कुल 53 सीटें मिलीं। यह स्थिति बताती है कि मतदाताओं ने एक नए विकल्प पर भरोसा जताया है, लेकिन किसी भी दल को स्पष्ट जनादेश नहीं दिया। अब सवाल यह है कि क्या विजय 1967 के बाद राज्य के पहले गैर-DMK और गैर-AIADMK मुख्यमंत्री बन पाएंगे, और वह सरकार बनाने के लिए किसके साथ गठबंधन करेंगे।
विजय के सामने विकल्प: छोटे दलों का साथ

TVK को सरकार बनाने के लिए 11 और विधायकों की आवश्यकता है। एक संभावित परिदृश्य यह है कि विजय DMK गठबंधन के भीतर के छोटे दलों को अपने साथ ले लें। DMK गठबंधन में छोटे दलों के पास कुल 14 सीटें हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस का एक धड़ा चुनाव पूर्व TVK के साथ गठबंधन चाहता था और अब भी अपने 5 सदस्यों के साथ विजय का समर्थन कर सकता है। इसके अलावा, दो वामपंथी दल (CPI और CPI(M)) के पास 2-2 विधायक हैं। यदि ये दल TVK के साथ आते हैं, तो विजय को सरकार बनाने के लिए केवल कुछ और विधायकों की आवश्यकता होगी, जिसे दलित-केंद्रित विदुथलाई चिरुथैगल कज़गम (VCK) प्रदान कर सकती है। हालांकि, इस कदम से राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी INDIA गठबंधन पर क्या असर पड़ेगा और राज्य में DMK को दरकिनार किए जाने पर उसकी भूमिका क्या होगी, यह एक बड़ा सवाल है।
DMK का समर्थन या AIADMK से दूरी
एक अन्य संभावित परिदृश्य यह है कि पूरा DMK+ गठबंधन TVK का समर्थन करे, जिससे विजय बिना किसी बड़ी कठिनाई के मुख्यमंत्री बन सकें। यह गणितीय और राजनीतिक दोनों ही दृष्टि से संभव है, क्योंकि इससे राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक विपक्षी गठबंधन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि TVK के शामिल होने से वह और मजबूत ही होगा। लेकिन क्या DMK इसके लिए तैयार है? अब तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है। विजय ने DMK को अपना “राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी” बताया है और कई मौकों पर सीधे तौर पर पार्टी को निशाना बनाया है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि विजय DMK के साथ नहीं जाना चाहेंगे, क्योंकि वह एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली सरकार को मतदाताओं द्वारा अस्वीकार किए जाने के बाद संभावित सार्वजनिक प्रतिक्रिया को लेकर सतर्क हो सकते हैं। हालांकि, इसे देखने का एक और तरीका यह भी है कि मतदाताओं ने विजय पर भरोसा जताया, लेकिन यदि TVK मैदान में नहीं होती, तो उनकी दूसरी पसंद DMK होती, जिसने अकेले 60 सीटें जीतीं।
AIADMK के समर्थन का विकल्प भी सैद्धांतिक रूप से मौजूद है, लेकिन इसकी संभावना बहुत कम दिखती है। AIADMK और TVK के एक साथ आने के कोई संकेत नहीं हैं, बल्कि सार्वजनिक बयान इसके विपरीत रहे हैं। AIADMK के वरिष्ठ नेता सी. पोन्नैयान ने मतगणना जारी रहने के दौरान ही स्पष्ट कर दिया था कि उनकी पार्टी TVK से किसी भी गठबंधन प्रस्ताव को अस्वीकार कर देगी। यह बयान AIADMK की अपनी राजनीतिक स्थिति और TVK के साथ उनके संबंधों की जटिलता को दर्शाता है।
आगे की राह और राष्ट्रीय राजनीति पर असर
तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर चल रही यह खींचतान राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि विजय DMK गठबंधन के छोटे दलों के साथ मिलकर सरकार बनाते हैं, तो यह INDIA गठबंधन के भीतर तनाव पैदा कर सकता है। वहीं, यदि DMK TVK को बाहर से समर्थन देती है या गठबंधन में शामिल होती है, तो यह राष्ट्रीय विपक्षी एकता को मजबूत कर सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि विजय अपनी नई नवेली पार्टी के साथ इस जटिल राजनीतिक स्थिति को कैसे संभालते हैं और क्या वह तमिलनाडु की दशकों पुरानी DMK–AIADMK की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को तोड़कर एक नए युग की शुरुआत कर पाते हैं। आने वाले दिन तमिलनाडु की राजनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि सभी की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा और सरकार कैसे बनेगी।











