LIVE बुधवार, 17 जून 2026
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राजनीतिक

पीएम मोदी के बचत आह्वान पर विपक्ष का तीखा हमला: ‘विफलता का प्रमाण’

रविवार को विपक्षी दलों ने, जिसमें कांग्रेस के प्रमुख नेता राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल और कार्ति चिदंबरम शामिल थे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नागरिकों से ईंधन की खपत कम करने और मितव्ययिता अपनाने के आह्वान पर तीखा हमला बोला। प्रधानमंत्री ने यह आह्वान हैदराबाद में एक भाजपा रैली को संबोधित करते हुए किया था, जिसमें उन्होंने पश्चिम एशिया संकट और ईरान-अमेरिका संघर्ष के वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं तथा ईंधन कीमतों पर पड़ रहे असर के कारण विदेशी मुद्रा बचाने के लिए लोगों से सहयोग मांगा था। विपक्ष ने इसे सरकार की आर्थिक कुप्रबंधन और विफलता का प्रमाण बताया।

प्रधानमंत्री का आह्वान और विपक्ष की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी हैदराबाद रैली में नागरिकों से अपील की थी कि वे पेट्रोल और डीजल की खपत कम करें, अनावश्यक विदेश यात्राओं और सोने की खरीद को टालें, तथा वर्क फ्रॉम होम व वर्चुअल मीटिंग जैसे कार्य संस्कृति को फिर से अपनाएं। उनकी इस अपील का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता के कारण देश की विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाले दबाव को कम करना था। उन्होंने देशवासियों से इन वैश्विक चुनौतियों के बीच संयम और सहयोग की अपेक्षा की थी। इस आह्वान के तुरंत बाद, विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोल दिया और इसे देश की आर्थिक स्थिति को संभालने में सरकार की स्पष्ट विफलता का संकेत बताया। विपक्ष का तर्क था कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़कर जनता पर बोझ डाल रही है।

राहुल गांधी का ‘विफलता का प्रमाण’ आरोप

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के आह्वान पर सबसे पहले और तीखा हमला बोला। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा, “मोदी जी ने कल जनता से बलिदान की मांग की – सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम इस्तेमाल करो, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो का इस्तेमाल करो, घर से काम करो। ये उपदेश नहीं – ये विफलता के प्रमाण हैं।” राहुल गांधी ने आगे आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने “12 सालों में, देश को ऐसी स्थिति में ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है – क्या खरीदें, क्या न खरीदें, कहाँ जाएँ, कहाँ न जाएँ।” उन्होंने सरकार पर जवाबदेही से बचने के लिए जिम्मेदारी जनता पर डालने का आरोप लगाया और कहा कि “देश चलाना अब एक ‘समझौतावादी प्रधानमंत्री’ के बस की बात नहीं रही।” उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी, जिसमें सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए गए।

कांग्रेस के अन्य नेताओं के आरोप

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी प्रधानमंत्री पर हमला करते हुए कहा कि ईरान-अमेरिका युद्ध के “तीन महीने बाद भी” प्रधानमंत्री मोदी भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहे हैं। उन्होंने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, “यह शर्मनाक, लापरवाह और पूरी तरह अनैतिक है कि प्रधानमंत्री आम नागरिक को असुविधा में धकेल रहे हैं, बजाय इसके कि हमारी अर्थव्यवस्था इस वैश्विक संकट से अप्रभावित रहे, इसके लिए आकस्मिक योजनाएं बनाएं।” वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री “शासन और आर्थिक तैयारी” के बजाय “चुनावों और तुच्छ राजनीति” को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसका परिणाम “एक आसन्न आर्थिक तबाही” है। उन्होंने केंद्र सरकार से तुरंत कार्रवाई करने और पर्याप्त ईंधन भंडार सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि कोई भी नागरिक सरकार की योजना की कमी के कारण किसी भी कठिनाई का सामना न करे। इसके अतिरिक्त, कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने सरकार की स्थिति आकलन की गंभीरता पर सवाल उठाया और संसद का तत्काल सत्र बुलाने की मांग की। उन्होंने एक्स पर लिखा, “ये पीएमओइंडिया के बहुत गंभीर ‘निर्देश’ हैं, इसके पीछे क्या कारण हैं?” उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत संसद सत्र बुलाना चाहिए और देश को विश्वास में लेकर “सही स्थिति” से अवगत कराना चाहिए, जिसने इन ‘अपीलों’ को आवश्यक बना दिया है।

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आगे की राह और राजनीतिक निहितार्थ

विपक्ष के इस तीखे हमले ने पश्चिम एशिया संकट के बीच देश की आर्थिक चुनौतियों और सरकार की प्रतिक्रिया पर एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। विपक्षी दल सरकार पर गलत प्राथमिकताओं और कुप्रबंधन का आरोप लगा रहे हैं, जबकि सरकार वैश्विक परिस्थितियों को इसका कारण बता रही है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें अस्थिर हैं और कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक तनाव से प्रभावित हो रही हैं। आने वाले समय में, ईंधन की कीमतों और आर्थिक नीतियों पर यह बहस और तेज होने की संभावना है, खासकर जब कई राज्यों में विधानसभा चुनाव और आगामी आम चुनाव नजदीक आ रहे हैं। सरकार को न केवल अंतर्राष्ट्रीय भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना होगा, बल्कि घरेलू मोर्चे पर विपक्षी हमलों का भी जवाब देना होगा, जिससे यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाए रख सकता है और आगामी चुनावों में एक प्रमुख मुद्दा बन सकता है।

Heshma lahre
लेखक / Author

Heshma lahre is a dedicated journalist at Dabang Awaz, known for her comprehensive coverage across all news categories, delivering accurate and timely reports with integrity.