कोंडागांव की सुनीता नेताम ने रचा इतिहास, एथलेटिक्स, कबड्डी और वॉलीबॉल तीनों खेलों में राष्ट्रीय चयन, गांव में जश्न, छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण।
कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक बार फिर खेल जगत में सुनहरी खबर आई है। कोंडागांव जिले की प्रतिभाशाली खिलाड़ी सुनीता नेताम ने अपने दमदार प्रदर्शन से इतिहास रच दिया है। उन्होंने एक साथ तीन अलग-अलग खेलों में राष्ट्रीय स्तर पर चयन हासिल कर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए सम्मान का क्षण है।
गांव में खुशी की लहर
सुनीता नेताम के चयन की खबर मिलते ही उनके गांव और आसपास के इलाकों में जश्न का माहौल है। ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटी और ढोल-नगाड़ों के साथ खुशियां मनाईं। ग्रामीणों का कहना है कि सुनीता ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा अवसर मिलने पर किसी भी ऊंचाई तक पहुंच सकती है।
तीन खेलों में शानदार प्रदर्शन
जानकारी के अनुसार, सुनीता का चयन एथलेटिक्स, कबड्डी और वॉलीबॉल जैसे तीन खेलों में हुआ है। यह किसी भी खिलाड़ी के लिए एक असाधारण उपलब्धि है क्योंकि सामान्यत: खिलाड़ी एक या दो खेलों में ही विशेषज्ञता हासिल कर पाते हैं।
- एथलेटिक्स में उन्होंने राज्य स्तर पर कई पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई।
- कबड्डी में उनकी ताकत और रणनीति ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।
- वॉलीबॉल में उनकी स्मैश और तेज खेल ने राष्ट्रीय चयनकर्ताओं को प्रभावित किया।
सुनीता की मेहनत और संघर्ष
सुनीता नेताम का सफर आसान नहीं रहा। सीमित संसाधनों वाले परिवार से आने वाली सुनीता ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद खेल को कभी छोड़ा नहीं। उनके कोच बताते हैं कि वह रोजाना घंटों अभ्यास करती हैं और किसी भी चुनौती का सामना करने से पीछे नहीं हटतीं।
परिवार ने भी कठिन हालात में उनका पूरा साथ दिया। पिता खेती-किसानी से घर चलाते हैं, वहीं मां ने भी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव सहयोग दिया।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की सराहना
सुनीता की उपलब्धि पर जिले के खेल अधिकारी और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें बधाई दी है। खेल विभाग ने भी उन्हें आगे प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। कोंडागांव के नेताओं ने कहा कि सुनीता जैसी बेटियां ही जिले और प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाती हैं।
ग्रामीण खेलों से राष्ट्रीय स्तर तक
सुनीता की कहानी इस बात का उदाहरण है कि गांवों में छुपी प्रतिभा को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चमक सकती है। कोंडागांव जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र से निकलकर सुनीता ने साबित किया है कि मेहनत और लगन से हर सपना साकार किया जा सकता है।
अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा
सुनीता की यह उपलब्धि अन्य युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है। ग्रामीण क्षेत्रों की कई लड़कियां अब खेलों में करियर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती हैं।
समापन
कोंडागांव की बेटी सुनीता नेताम ने जो उपलब्धि हासिल की है, वह छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। तीन खेलों में राष्ट्रीय स्तर पर चयन अपने आप में एक अनूठा रिकॉर्ड है। सुनीता की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा को अवसर मिले तो ग्रामीण बेटियां भी देश का नाम रोशन कर सकती हैं।






