मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने रायपुर में डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का उज्ज्वल स्रोत है।
रायपुर। भारत के प्रथम राष्ट्रपति, स्वतंत्रता संग्राम के महानायक और संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने श्रद्धांजलि अर्पित की। राजधानी रायपुर में आयोजित विशेष कार्यक्रम में उन्होंने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर राष्ट्र के इस महान पुरुष को नमन किया।
कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों, सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों और बड़ी संख्या में छात्रों की उपस्थिति रही।
मंत्री राजवाड़े ने अपने वक्तव्य में कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जीवन देश के लिए प्रेरणा का अमूल्य स्रोत है। उनकी सादगी, ईमानदारी और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यनिष्ठा सदैव भारतीय समाज का मार्गदर्शन करती रहेगी। उन्होंने कहा कि डॉ. प्रसाद ने स्वतंत्रता आंदोलन में सहभागिता से लेकर राष्ट्रपति के रूप में अपनी कार्यशैली तक हर कदम पर आदर्श स्थापित किए।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे उनके सिद्धांतों और विचारों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभाएँ।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री राजवाड़े ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने शिक्षा, ग्रामीण विकास, किसान कल्याण और सामाजिक न्याय को हमेशा प्राथमिकता दी। वे मानते थे कि देश तभी सशक्त होगा जब अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचे।
मंत्री ने कहा कि आज राष्ट्र उनके आदर्शों के अनुरूप समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
समारोह में स्कूली बच्चों ने डॉ. प्रसाद के जीवन पर आधारित भाषण, कविताएँ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। मंत्री ने प्रतिभागी बच्चों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसी प्रस्तुतियाँ बच्चों में राष्ट्रभक्ति और देश के इतिहास को समझने की भावना को मजबूत करती हैं।
कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन युवा पीढ़ी को इतिहास के महान व्यक्तित्वों और संविधान निर्माताओं के बारे में जागरूक करते हैं। डॉ. प्रसाद का योगदान न केवल स्वतंत्रता आंदोलन तक सीमित था, बल्कि उन्होंने स्वतंत्र भारत की प्रशासनिक और संवैधानिक संरचना को भी मजबूती दी।
मंत्री राजवाड़े ने कहा कि डॉ. प्रसाद का जीवन त्याग, संघर्ष और करुणा का प्रतीक है। उनकी सोच और कार्यशैली आज भी प्रेरणादायक है। उन्होंने इस अवसर पर सभी नागरिकों से अपील की कि वे भारतीय संविधान के आदर्शों—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—को जीवन में उतारें।
समारोह के अंत में मंत्री ने उपस्थित नागरिकों और छात्रों से कहा कि ऐसे महान नेताओं की जयंती पर सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उनके मूल्यों को अपनाने का संकल्प लेना चाहिए। कार्यक्रम राष्ट्र के इस महानायक को श्रद्धांजलि और प्रेरणा का संदेश देते हुए संपन्न हुआ।










