आज देशभर के लाखों केमिस्टों और दवा विक्रेताओं ने ऑनलाइन दवा बिक्री के प्रस्तावित नियमों के विरोध में एक राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इस हड़ताल के तहत मुंगेली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में सभी मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिससे मरीजों और आम जनता को दवाओं की उपलब्धता में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के बैनर तले यह विरोध प्रदर्शन सरकार पर ऑनलाइन फार्मेसी नियमों को वापस लेने का दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, जिसे वे अपने व्यवसाय और जनता के स्वास्थ्य के लिए खतरा मानते हैं।
हड़ताल का व्यापक असर
अखिल भारतीय केमिस्ट संघ (AIOCD) के आह्वान पर हुई इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर पूरे देश में देखने को मिला। मुंगेली जैसे छोटे शहरों से लेकर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों तक, सभी मेडिकल स्टोर और दवा दुकानें पूरी तरह से बंद रहीं। इस अचानक बंद ने उन मरीजों के लिए गंभीर समस्या खड़ी कर दी, जिन्हें तत्काल दवाओं की आवश्यकता थी, विशेषकर गंभीर बीमारियों और आपातकालीन स्थितियों वाले मरीजों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर लोगों को अपनी जरूरी दवाएं खरीदने के लिए भटकना पड़ा। अनुमान है कि इस एक दिवसीय हड़ताल के कारण देशभर में हजारों करोड़ रुपये का दवा कारोबार प्रभावित हुआ है। आवश्यक सेवाओं के तहत आने वाली दवा दुकानों के बंद होने से स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सीधा असर पड़ा, हालांकि कई अस्पतालों ने अपने भीतर की फार्मेसियों को खुला रखा ताकि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को परेशानी न हो।
ऑनलाइन दवा नियमों के खिलाफ विरोध

केमिस्टों की इस हड़ताल का मुख्य कारण केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित ऑनलाइन दवा बिक्री नियमों का विरोध है। AIOCD का तर्क है कि ये नियम न केवल पारंपरिक दवा विक्रेताओं के व्यवसाय के लिए खतरा हैं, बल्कि ये जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए भी गंभीर जोखिम पैदा करते हैं। संगठन का कहना है कि ऑनलाइन माध्यम से बेची जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता और प्रामाणिकता सुनिश्चित करना मुश्किल है। इससे नकली दवाओं की बिक्री बढ़ने, नशीली दवाओं के दुरुपयोग में वृद्धि होने और बिना डॉक्टर के पर्चे के भी दवाओं की आसान उपलब्धता होने का खतरा है। केमिस्टों का मानना है कि ऑनलाइन फार्मेसियों के आने से छोटे और मध्यम वर्ग के दवा विक्रेताओं का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा, जिससे लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। वे यह भी तर्क देते हैं कि ऑनलाइन बिक्री से दवाओं की कोल्ड चेन बनाए रखना मुश्किल होगा, जिससे उनकी प्रभावशीलता पर असर पड़ सकता है।
केमिस्टों की प्रमुख मांगें
अखिल भारतीय केमिस्ट संघ ने सरकार से अपनी मांगों को तुरंत स्वीकार करने का आग्रह किया है। उनकी प्रमुख मांगों में ऑनलाइन फार्मेसियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना या फिर उन्हें अत्यधिक कड़े विनियमन के तहत लाना शामिल है। संगठन का कहना है कि दवा एक सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं है, बल्कि यह एक संवेदनशील उत्पाद है जिसका सीधा संबंध मानव जीवन से है। इसलिए, इसकी बिक्री पर सख्त नियंत्रण आवश्यक है। AIOCD ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया, तो वे भविष्य में और भी बड़े और अनिश्चितकालीन आंदोलनों के लिए मजबूर होंगे। वे चाहते हैं कि सरकार मौजूदा ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स 1945 के प्रावधानों को सख्ती से लागू करे, जो दवाओं की बिक्री और वितरण को नियंत्रित करते हैं, और ऑनलाइन बिक्री के लिए अलग से कोई ढील न दे। केमिस्टों का यह भी कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स द्वारा दी जाने वाली भारी छूट से बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा हो रही है, जिससे उनके लिए काम करना मुश्किल हो रहा है।
आगे की रणनीति और सरकार पर दबाव
केमिस्टों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल ने सरकार पर ऑनलाइन दवा बिक्री नियमों पर पुनर्विचार करने का दबाव बढ़ा दिया है। AIOCD के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह हड़ताल केवल एक शुरुआत है और यदि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लेती है, तो वे अपनी लड़ाई को और तेज करेंगे। संभावना है कि आने वाले दिनों में संगठन सरकार के साथ बातचीत करने का प्रयास करेगा, लेकिन यदि बातचीत विफल रहती है, तो अनिश्चितकालीन बंद या अन्य प्रकार के विरोध प्रदर्शनों की घोषणा की जा सकती है। इस पूरे प्रकरण का सीधा असर देश की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली और दवा वितरण नेटवर्क पर पड़ रहा है। सरकार के लिए यह एक चुनौती है कि वह कैसे पारंपरिक दवा विक्रेताओं के हितों और डिजिटल इंडिया की पहल के बीच संतुलन स्थापित करती है, साथ ही यह सुनिश्चित करती है कि दवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता किसी भी कीमत पर प्रभावित न हो। इस मुद्दे पर सरकार का अगला कदम देश में दवा वितरण के भविष्य की दिशा तय करेगा।










