LIVE मंगलवार, 16 जून 2026
Advertisement Vastu Guruji
छत्तीसगढ़

गर्मी में राहत! छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 2 दिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के मद्देनजर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसके तहत अब सप्ताह में दो दिन, मंगलवार और शुक्रवार को, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामलों की सुनवाई की जाएगी। यह कदम अधिवक्ताओं, न्यायिक कर्मचारियों और वादकारियों को गर्मी की मार से बचाने और न्याय प्रक्रिया को सुचारू रूप से जारी रखने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिससे भौतिक उपस्थिति की आवश्यकता कम होगी।

क्या है नया फैसला?

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा जारी नवीनतम आदेश के अनुसार, भीषण गर्मी के कारण उत्पन्न होने वाली असुविधाओं को देखते हुए, सप्ताह के दो दिनमंगलवार और शुक्रवार – को सभी मामलों की सुनवाई केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जाएगी। इन दिनों में, अदालत परिसर में अधिवक्ताओं या वादकारियों की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी। यह फैसला उच्च न्यायालय के साथ-साथ राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों पर भी लागू होगा, जिससे पूरे न्यायिक तंत्र को एक समान राहत मिलेगी। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया की निरंतरता बनाए रखते हुए सभी हितधारकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।

फैसले के पीछे का कारण

1500x900_372955-madhya-pradesh-high-court-introduces-hybrid-hearing-option-all-benches-supreme-court-directive

इस महत्वपूर्ण निर्णय के पीछे छत्तीसगढ़ में हर साल पड़ने वाली भीषण गर्मी एक प्रमुख कारण है। राज्य के कई हिस्सों में गर्मियों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है, जिससे बाहरी गतिविधियों और यात्रा में भारी कठिनाई होती है। ऐसे में, अदालत परिसर तक पहुंचना अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और वादकारियों के लिए एक चुनौती बन जाता है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कोविड-19 महामारी के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई का सफल अनुभव भी इस फैसले की नींव बना। उस दौरान न्यायपालिका ने दिखाया था कि तकनीक का उपयोग करके भी न्याय वितरण प्रणाली को प्रभावी ढंग से चलाया जा सकता है। यह फैसला न्यायिक समुदाय को गर्मी से होने वाली बीमारियों और यात्रा संबंधी जोखिमों से बचाने के लिए एक आवश्यक कदम है।

अधिवक्ताओं और न्यायपालिका पर असर

इस फैसले का अधिवक्ताओं और न्यायपालिका पर व्यापक और सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है। अधिवक्ताओं को अदालत आने-जाने में लगने वाले समय और ऊर्जा की बचत होगी, जिसका उपयोग वे अपने मुकदमों की तैयारी में कर सकेंगे। दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले अधिवक्ताओं के लिए यह विशेष रूप से फायदेमंद होगा, क्योंकि उन्हें लंबी यात्रा से बचना होगा। यह कदम न्यायिक प्रक्रिया में तकनीकी एकीकरण को और बढ़ावा देगा, जिससे न्यायिक प्रणाली अधिक सुलभ और कुशल बनेगी। हालांकि, कुछ अधिवक्ताओं को तकनीकी पहुंच या कौशल संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन दीर्घकालिक रूप से यह एक प्रगतिशील बदलाव है जो न्यायपालिका को आधुनिक बनाने में सहायक होगा। यह न्याय तक पहुंच को भी बेहतर बनाएगा, क्योंकि अब भौगोलिक बाधाएं कम होंगी।

विज्ञापन
Advertisement

अन्य राज्यों में स्थिति और भविष्य

यह पहली बार नहीं है जब किसी उच्च न्यायालय ने इस तरह का कदम उठाया है। देश के कई अन्य उच्च न्यायालयों ने भी विभिन्न परिस्थितियों में, विशेषकर महामारी के दौरान, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और रिमोट सुनवाई को अपनाया है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का यह फैसला न्यायपालिका के डिजिटलीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। यह दर्शाता है कि भारतीय न्यायपालिका बदलती परिस्थितियों के अनुकूल ढलने और आधुनिक तकनीक का लाभ उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। भविष्य में, ऐसी हाइब्रिड सुनवाई (भौतिक और वर्चुअल का मिश्रण) एक सामान्य चलन बन सकती है, जिससे न्यायिक दक्षता बढ़ेगी और न्याय तक पहुंच बेहतर होगी। यह निर्णय न्याय वितरण प्रणाली को अधिक लचीला, कुशल और सभी के लिए सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करेगा।

Dipti Das
लेखक / Author

दीप्ति दास दबंग आवाज़ की संवाददाता हैं, जो विभिन्न विषयों पर सटीक और संतुलित रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं।