LIVE मंगलवार, 16 जून 2026
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कृषि

धान की सीधी बिजाई पर 4500 रुपये/एकड़ अनुदान, कैथल में लक्ष्य तय

हरियाणा के कैथल जिले में किसानों को धान की सीधी बिजाई (डीएसआर – Direct Seeded Rice) तकनीक अपनाने के लिए 4500 रुपये प्रति एकड़ का अनुदान दिया जाएगा। जिला उपायुक्त अपराजिता ने किसानों से इस लाभकारी विधि को अपनाने की अपील की है, जिससे न केवल पानी की बचत होगी बल्कि खेती की लागत भी कम आएगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। इस वर्ष जिले में 15 हजार एकड़ भूमि पर धान की सीधी बिजाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं।

डीएसआर विधि: एक लाभकारी तकनीक

धान की सीधी बिजाई (डीएसआर) विधि पारंपरिक धान रोपण की तुलना में एक आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक है। पारंपरिक विधि में पहले नर्सरी में पौधे तैयार किए जाते हैं और फिर उन्हें पानी भरे खेतों में रोपा जाता है, जिसमें अत्यधिक पानी की खपत होती है। इसके विपरीत, डीएसआर विधि में धान के बीजों को सीधे खेत में बोया जाता है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. रविंद्र हुड्डा ने बताया कि इस तकनीक से पानी की बचत होती है क्योंकि खेत में लगातार पानी भरने की आवश्यकता नहीं पड़ती। साथ ही, यह विधि पौधों को पर्याप्त हवा और रोशनी सुनिश्चित करती है, जिससे फसल गिरने का खतरा कम होता है। यह विधि कीटों और बीमारियों के प्रभाव को भी कम करती है, जिससे अंततः पैदावार बढ़ने की संभावना रहती है।

सरकारी प्रोत्साहन और लक्ष्य

सरकार किसानों को डीएसआर विधि अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। डीसी अपराजिता ने बताया कि जो किसान इस विधि से धान की बुवाई करेंगे, उन्हें 4500 रुपये प्रति एकड़ की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी जाएगी। यह पहल किसानों को नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके अतिरिक्त, किसानों को डीएसआर मशीन खरीदने पर भी भारी सब्सिडी प्रदान की जा रही है। सरकार मशीन की कुल कीमत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 40 हजार रुपये तक की सहायता दे रही है। कैथल जिले में इस वर्ष 15 हजार एकड़ भूमि पर डीएसआर तकनीक से धान की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है, जो जल संरक्षण के प्रयासों को गति देगा।

जल संरक्षण और कृषि लागत में कमी

डीएसआर विधि का सबसे बड़ा लाभ जल संरक्षण है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में जहां भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, वहां यह तकनीक पानी की बचत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पारंपरिक धान रोपण में प्रति एकड़ हजारों लीटर पानी की आवश्यकता होती है, जबकि डीएसआर विधि में पानी का उपयोग काफी कम हो जाता है। डॉ. रविंद्र हुड्डा ने बताया कि यह विधि न केवल पानी बचाती है, बल्कि खेती की लागत को भी कम करती है। नर्सरी तैयार करने, पौधों को रोपने और लगातार पानी देने में लगने वाले श्रम और ईंधन की बचत होती है। कम लागत और बेहतर पैदावार के संयोजन से किसानों की आय में निश्चित रूप से वृद्धि होगी। यह किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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आवेदन प्रक्रिया और विशेषज्ञ सलाह

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने इच्छुक किसानों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। डॉ. रविंद्र हुड्डा ने बताया कि अनुदान का लाभ उठाने के लिए किसानों को सबसे पहले “मेरी फसल-मेरा ब्यौरा” पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होगा। इसके साथ ही, डीएसआर मशीन की खरीद पर सब्सिडी के लिए आवेदन करते समय ट्रैक्टर की वैध आरसी (Registration Certificate) जैसे दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे धान रोपाई के पारंपरिक तरीकों के बजाय डीएसआर तकनीक अपनाएं, क्योंकि यह न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है बल्कि किसानों के लिए भी अधिक लाभकारी है। यह एक ऐसी तकनीक है जो भविष्य की कृषि आवश्यकताओं को पूरा करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सहायक होगी। सरकार और कृषि विभाग मिलकर किसानों को इस नई तकनीक के बारे में जागरूक कर रहे हैं और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।

Dipti Das
लेखक / Author

दीप्ति दास दबंग आवाज़ की संवाददाता हैं, जो विभिन्न विषयों पर सटीक और संतुलित रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं।