श्री डेका ने कहा कि भू-जल स्तर बचाने के लिए किसानों को डबरी निर्माण हेतु प्रोत्साहित करना जरूरी है, जिससे सिंचाई, जल संरक्षण और कृषि विकास को बढ़ावा मिलेगा।
रायपुर। प्रदेश में घटते भू-जल स्तर को बचाने और जल संकट से निपटने के लिए सरकार अब किसानों को डबरी निर्माण के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इस संबंध में श्री डेका ने कहा कि किसानों को छोटे-छोटे जल संरचनाओं (डबरियों) के निर्माण की ओर प्रेरित करना समय की मांग है। इससे न केवल कृषि को स्थायित्व मिलेगा, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी कायम रहेगा।
जल संरक्षण की चुनौती
छत्तीसगढ़ के कई क्षेत्रों में भू-जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। गर्मी के मौसम में कुएं और बोरवेल सूखने की समस्या आम हो गई है। ऐसे में बरसाती पानी को संरक्षित करना सबसे प्रभावी उपाय है। श्री डेका ने कहा कि डबरियां इस दिशा में बेहद कारगर साबित हो सकती हैं।
डबरी निर्माण का महत्व
डबरी यानी खेतों में बनाए गए छोटे जलाशय। ये बरसाती पानी को इकट्ठा कर लंबे समय तक संरक्षित रखते हैं।
- इनसे भू-जल स्तर रिचार्ज होता है।
- खेतों में सिंचाई की सुविधा बनी रहती है।
- पशुओं और ग्रामीणों को भी पानी उपलब्ध होता है।
- यह प्रणाली कम लागत और लंबे समय तक लाभकारी होती है।
किसानों की भूमिका
श्री डेका ने कहा कि सरकार योजनाएं बना सकती है, लेकिन किसानों की सक्रिय भागीदारी सबसे जरूरी है। अगर हर किसान अपने खेत में डबरी का निर्माण करे, तो पूरे राज्य में जल संकट पर काबू पाया जा सकता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे इसे एक निवेश और स्थायी संपत्ति की तरह देखें।
सरकार की पहल
राज्य सरकार किसानों को डबरी निर्माण के लिए आर्थिक सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण प्रदान कर रही है। कई जिलों में कृषि विभाग और पंचायत मिलकर इस दिशा में काम कर रहे हैं।
इसके साथ ही मनरेगा जैसी योजनाओं के जरिए भी ग्रामीणों को रोजगार देते हुए डबरी निर्माण को गति दी जा रही है।
विशेषज्ञों की राय
जल विशेषज्ञों का मानना है कि अगर डबरी निर्माण को व्यापक स्तर पर लागू किया जाए, तो प्रदेश में कृषि उत्पादन बढ़ेगा और जल संकट पर नियंत्रण मिलेगा। इसके साथ ही यह पहल जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी मददगार साबित होगी।
किसानों के अनुभव
कई किसानों ने बताया कि डबरी बनने से उन्हें लगातार फसल की सिंचाई में मदद मिली है। बलरामपुर जिले के किसान रामलाल साहू कहते हैं, “पहले हर गर्मी में बोरवेल सूख जाते थे, लेकिन अब डबरी से खेतों को समय पर पानी मिल रहा है।”
भविष्य की दिशा
श्री डेका ने कहा कि आने वाले वर्षों में सरकार का लक्ष्य है कि हर गांव और हर किसान अपने खेत में डबरी बनाए। यह मिशन आत्मनिर्भर कृषि और सुरक्षित जल संसाधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
निष्कर्ष
भू-जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी जरूरत है। डबरी निर्माण इस दिशा में न केवल कारगर उपाय है, बल्कि यह किसानों और समाज दोनों के लिए लाभकारी है। श्री डेका का आह्वान प्रदेश के लिए एक हरित और जल-सुरक्षित भविष्य की ओर संकेत करता है।






