LIVE बुधवार, 17 जून 2026
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भारतीय रेलवे से मिटेगी अंग्रेजों की आखिरी पहचान, हाईटेक सिस्टम बताएगा सटीक लोकेशन

भारतीय रेलवे ने एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ब्रिटिश-युग के मील के पत्थरों को चरणबद्ध तरीके से हटाने का निर्णय लिया है। अब इनकी जगह एक अत्याधुनिक, GPS-आधारित हाईटेक सिस्टम ट्रेनों और रेलवे संचालन की सटीक लोकेशन बताएगा। यह पहल रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसका उद्देश्य परिचालन दक्षता, सुरक्षा और यात्रियों की सुविधा में सुधार करना है और साथ ही देश की आजादी के 75 साल बाद भी रेलवे पर बनी ब्रिटिश-युग की आखिरी पहचान को मिटाना है। यह बदलाव न सिर्फ प्रतीकात्मक है, बल्कि तकनीकी रूप से भी रेलवे को इक्कीसवीं सदी की जरूरतों के हिसाब से तैयार करेगा।

अंग्रेजों की आखिरी पहचान का अंत

भारतीय रेलवे में मील के पत्थर, जिन्हें ‘माइल स्टोन’ कहा जाता है, अंग्रेजों द्वारा 19वीं सदी में रेलवे लाइन बिछाने और स्टेशनों के बीच की दूरी मापने के लिए लगाए गए थे। ये पत्थर आमतौर पर हर मील पर लगाए जाते थे और उन पर स्टेशनों से दूरी अंकित होती थी। यह प्रणाली लगभग 160 वर्षों से भारतीय रेल का अभिन्न अंग रही है और ब्रिटिश राज की एक स्थायी निशानी के तौर पर देखी जाती थी। अब इन पत्थरों को हटाकर रेलवे अपनी परिचालन प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और आधुनिक बना रहा है। यह कदम न केवल तकनीकी रूप से उन्नत है, बल्कि औपनिवेशिक अतीत से मुक्ति और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत संदेश भी देता है। रेलवे का यह निर्णय भारत सरकार की उस व्यापक नीति का हिस्सा है जिसके तहत देश से हर उस प्रतीक या पहचान को हटाया जा रहा है जो गुलामी के दौर की याद दिलाता है।

हाईटेक सिस्टम: ‘कवच’ और डिजिटल पहचान

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मील के पत्थरों की जगह अब भारतीय रेलवे एक एकीकृत GPS-आधारित लोकेशन सिस्टम अपनाएगा। इस सिस्टम का मुख्य आधार स्वदेशी रूप से विकसित ‘कवच’ प्रणाली है, जो एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (ATP) प्रणाली है। ‘कवच’ न केवल ट्रेनों की टक्कर रोकने में मदद करती है, बल्कि यह ट्रेनों की सटीक स्थिति को भी लगातार ट्रैक करती है। इसके अलावा, रेलवे अपने ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (OFC) और अन्य डिजिटल संचार प्रणालियों का उपयोग करके ट्रेनों और रेलवे परिसंपत्तियों की वास्तविक समय की लोकेशन प्रदान करेगा। यह नई प्रणाली लोको पायलटों को डिजिटल डिस्प्ले पर सटीक दूरी और स्थान की जानकारी देगी, जिससे उन्हें मैन्युअल रूप से मील के पत्थरों को देखने की आवश्यकता नहीं होगी। यह तकनीक नियंत्रण कक्षों को भी हर ट्रेन की पल-पल की जानकारी उपलब्ध कराएगी, जिससे परिचालन प्रबंधन कहीं अधिक कुशल हो जाएगा।

सुरक्षा और दक्षता में वृद्धि

इस हाईटेक प्रणाली के लागू होने से भारतीय रेलवे की सुरक्षा और परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा। ट्रेनों की सटीक लोकेशन मिलने से किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देना संभव होगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी ट्रेन में तकनीकी खराबी आती है या पटरी पर कोई बाधा आती है, तो नियंत्रण कक्ष को तुरंत उसकी सही लोकेशन मिल जाएगी, जिससे बचाव और मरम्मत कार्य में लगने वाला समय कम हो जाएगा। रेलवे बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, यह प्रणाली दुर्घटनाओं को रोकने में भी सहायक होगी, क्योंकि ‘कवच’ तकनीक ओवर-स्पीडिंग, सिग्नल पासिंग एट डेंजर (SPAD) और आमने-सामने की टक्कर जैसी घटनाओं को रोकने के लिए डिज़ाइन की गई है। इसके अतिरिक्त, ट्रैक रखरखाव, सिग्नलिंग और अन्य बुनियादी ढांचे के प्रबंधन में भी यह सटीक लोकेशन डेटा बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा और परिचालन लागत में भी कमी आएगी।

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रेलवे के भविष्य की दिशा

भारतीय रेलवे का यह कदम आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण की व्यापक योजना का हिस्सा है। रेलवे का लक्ष्य 2024 तक पूरी तरह से विद्युतीकृत होने और विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा विकसित करने का है। मील के पत्थरों को हटाकर हाईटेक सिस्टम अपनाना इसी लक्ष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। यह बदलाव न केवल भारतीय रेलवे को वैश्विक मानकों के अनुरूप लाएगा, बल्कि यात्रियों को भी बेहतर और सुरक्षित यात्रा अनुभव प्रदान करेगा। भविष्य में, यह प्रणाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी तकनीकों के साथ एकीकृत होकर रेलवे परिचालन को और भी स्मार्ट बना सकती है, जिससे पूर्वानुमानित रखरखाव, ऊर्जा दक्षता और यात्री सेवाओं में क्रांतिकारी सुधार आ सकते हैं। यह भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान को भी मजबूत करता है, जो देश को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी बनाने पर केंद्रित है।

Dipti Das
लेखक / Author

दीप्ति दास दबंग आवाज़ की संवाददाता हैं, जो विभिन्न विषयों पर सटीक और संतुलित रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं।