उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज भाजपा नेता मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेवानिवृत्त) को आज देहरादून में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने उनके बसंत विहार स्थित आवास पर पुष्पचक्र अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने व्यक्तिगत रूप से पूर्व मुख्यमंत्री की अर्थी को कंधा देकर उन्हें अंतिम विदाई दी, जो उनके प्रति सम्मान और आत्मीयता को दर्शाता है। उनके निधन पर राज्य सरकार ने 19 मई से 21 मई तक तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है, जिससे पूरे प्रदेश में गहरा शोक व्याप्त है।
राजकीय सम्मान और शोक की घोषणा
पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी के आकस्मिक निधन के बाद, उत्तराखंड सरकार ने उनके सम्मान में महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। राज्य में बुधवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है, जिसके निर्देश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिए थे। इसके अतिरिक्त, शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 19 मई से 21 मई तक तीन दिवसीय राजकीय शोक रहेगा। इस अवधि के दौरान, प्रदेश के समस्त सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे और कोई भी शासकीय मनोरंजन के कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे। यह निर्णय दिवंगत नेता के प्रति राज्य के सर्वोच्च सम्मान और उनके योगदान को स्वीकार करने के प्रतीक के रूप में लिया गया है। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित देश के कई अन्य शीर्ष नेताओं ने भी उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है।
खंडूड़ी का राजनीतिक और प्रशासनिक सफर
मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का राजनीतिक जीवन जनसेवा और ईमानदारी का एक लंबा अध्याय रहा है। वह दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। पहली बार उन्होंने मार्च 2007 से जून 2009 तक राज्य की कमान संभाली। इस कार्यकाल के दौरान, उन्होंने प्रशासनिक सुधारों, सड़क निर्माण और शासन में पारदर्शिता लाने के लिए कई महत्वपूर्ण और कड़े फैसले लिए, जिनकी आज भी सराहना की जाती है। हालांकि, 2009 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन को देखते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। बाद में, सितंबर 2011 में उन्हें एक बार फिर उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनाया गया और उन्होंने मार्च 2012 तक दूसरी बार इस पद पर रहते हुए राज्य की सेवा की। उनकी छवि एक ऐसे नेता की थी जो हमेशा सिद्धांतों और शुचिता को प्राथमिकता देते थे, भले ही इसके लिए उन्हें राजनीतिक जोखिम उठाना पड़े।
एक जननेता की विरासत
मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी सिर्फ एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वह उत्तराखंड की जनता के लिए एक प्रेरणास्रोत और संरक्षक थे। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और अपनी सैन्य पृष्ठभूमि की अनुशासन, ईमानदारी और समर्पण को सार्वजनिक जीवन में भी बनाए रखा। उन्होंने उत्तराखंड के विकास के लिए अथक प्रयास किए और राज्य को एक मजबूत प्रशासनिक नींव प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सरलता, सुलभता और आम आदमी से जुड़ाव उन्हें एक लोकप्रिय नेता बनाता था। उन्होंने हमेशा भ्रष्टाचार मुक्त शासन और जनहितैषी नीतियों को बढ़ावा दिया। उनकी विरासत में उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों का जाल बिछाने और प्रशासन को जनता के प्रति अधिक जवाबदेह बनाने जैसे कार्य शामिल हैं। उनका निधन उत्तराखंड के लिए एक अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनके कार्य और सिद्धांत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।
आगे की राह
मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन से उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है। उनके सम्मान में घोषित राजकीय शोक और सार्वजनिक अवकाश यह दर्शाता है कि राज्य ने एक महान सपूत और दूरदर्शी नेता को खो दिया है। उनकी विचारधारा और जनसेवा के प्रति समर्पण को आगे बढ़ाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं, और पूरे राज्य में लोग इस दुखद घड़ी में एकजुटता दिखा रहे हैं। उत्तराखंड के इतिहास में भुवन चंद्र खंडूड़ी का नाम हमेशा एक ऐसे मुख्यमंत्री के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने निस्वार्थ भाव से राज्य की सेवा की और विकास की मजबूत नींव रखी।










