मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर के दुलदुला छठ घाट में सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की, जनता संग किया आस्था पर्व का उत्सव।
रायपुर । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रविवार को जशपुर जिले के प्रसिद्ध दुलदुला छठ घाट में पहुँचकर छठ महापर्व के अवसर पर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने घाट पर आयोजित पूजा-अर्चना में सम्मिलित होकर छठी मइया से प्रदेश के उज्जवल भविष्य की प्रार्थना की।
🌅 श्रद्धा और आस्था का पर्व छठ
छठ महापर्व छत्तीसगढ़ सहित पूरे भारत में आस्था, अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक माना जाता है।
इस पर्व पर भक्तजन सूर्य भगवान और छठी मइया की पूजा करते हैं और उगते एवं अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छठ पर्व भारतीय संस्कृति का अनूठा उदाहरण है, जिसमें प्रकृति, जल, सूर्य और मातृत्व शक्ति के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है।
उन्होंने कहा —
“छठ महापर्व हमें त्याग, तपस्या और अनुशासन की प्रेरणा देता है। यह पर्व समाज में एकता, स्वच्छता और आध्यात्मिकता का संदेश लेकर आता है।”
🙏 मुख्यमंत्री ने की जनता से संवाद
दुलदुला घाट पर मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रद्धालुओं से मुलाकात की और उनकी कुशलक्षेम पूछी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।
राज्य सरकार का उद्देश्य है कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराएं, त्यौहार और धार्मिक आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनें।
मुख्यमंत्री ने जशपुर प्रशासन को बधाई देते हुए कहा कि छठ पर्व के दौरान सुरक्षा, स्वच्छता और व्यवस्था के लिए जो इंतज़ाम किए गए हैं, वे सराहनीय और अनुकरणीय हैं।
🌊 दुलदुला छठ घाट बना आस्था का केंद्र
छठ पर्व के अवसर पर जशपुर का दुलदुला छठ घाट श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा।
हजारों श्रद्धालुओं ने घाट पर पहुंचकर सूर्य को अर्घ्य दिया और पारंपरिक गीतों के साथ माहौल को भक्तिमय बना दिया।
महिलाओं ने सूप में फल, गन्ना, नारियल और ठेकुआ जैसी पारंपरिक सामग्री लेकर सूर्य देव की पूजा की।
मुख्यमंत्री साय के आगमन से घाट का माहौल और भी भावनात्मक और ऊर्जा से भरा नजर आया।
उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ खड़े होकर अर्घ्य दिया और सूर्य को प्रणाम किया।
🪔 छठ पूजा का महत्व
छठ पूजा सूर्य उपासना का सबसे प्राचीन पर्व है। यह पर्व चार दिनों तक चलता है —
पहला दिन नहाय खाय, दूसरा खरना, तीसरा संध्या अर्घ्य और चौथा उषा अर्घ्य के रूप में मनाया जाता है।
मान्यता है कि इस पूजा से आरोग्य, संतान सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।
छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों में छठ पर्व का आयोजन बड़ी संख्या में मनाया जाने लगा है, खासकर जशपुर, रायगढ़, रायपुर और बिलासपुर में यह पर्व विशेष रूप से लोकप्रिय है।
🌼 प्रदेश की खुशहाली की कामना
मुख्यमंत्री श्री साय ने छठ घाट पर कहा —
“मैं भगवान सूर्य और छठी मइया से प्रार्थना करता हूँ कि वे छत्तीसगढ़ के हर नागरिक के जीवन में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रकाश फैलाएँ।”
उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिकता राज्य की असली ताकत है।
सरकार इन मूल्यों को सहेजने और जन-जन तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
🏗️ प्रशासन ने की व्यापक तैयारियाँ
जशपुर जिला प्रशासन और नगर पंचायत दुलदुला ने इस अवसर पर व्यापक सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था की थी।
घाट पर बिजली, पानी, चिकित्सा और पार्किंग की सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं।
पुलिस और स्वयंसेवी संस्थाओं ने श्रद्धालुओं के आवागमन और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा।
प्रशासन ने नदी किनारे अस्थायी बैरिकेडिंग और लाइटिंग सिस्टम लगाया, ताकि अर्घ्य देने के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।
महिलाओं और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए सहायता केंद्र और प्राथमिक चिकित्सा बूथ भी बनाए गए थे।
📸 स्थानीय कलाकारों और समूहों की प्रस्तुति
दुलदुला घाट पर स्थानीय सांस्कृतिक समूहों ने छठ महिमा गीत, छत्तीसगढ़ी लोकगीत और भक्ति नृत्य प्रस्तुत किए।
मुख्यमंत्री ने कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देते हैं और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखते हैं।
🕊️ जन-जन की भागीदारी
छठ महापर्व के इस आयोजन में जशपुर जिले के अलावा कोरिया, रायगढ़ और अंबिकापुर से भी श्रद्धालु पहुंचे।
सभी ने सूर्यदेव की आराधना कर परिवार की उन्नति और प्रदेश की प्रगति की प्रार्थना की।
कार्यक्रम में महिला स्व-सहायता समूहों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई और स्वच्छता अभियान चलाया।
🌞 मुख्यमंत्री का संदेश
कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री श्री साय ने जनता को संबोधित करते हुए कहा —
“छत्तीसगढ़ की धरती श्रद्धा, संस्कार और समृद्धि की भूमि है।
छठ पर्व इस भावना को और भी सशक्त बनाता है।
हम सब मिलकर अपने राज्य को समृद्ध, सुरक्षित और संस्कारित बनाएँ।”






