छत्तीसगढ़ के कॉलेजों में ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम शुरू होगा, जिससे विद्यार्थियों को बाल अधिकार, सुरक्षा और संरक्षण से जुड़ी जानकारी मिलेगी और समाज में जागरूकता बढ़ेगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बाल सुरक्षा को मजबूत आधार देने के उद्देश्य से कॉलेजों में जल्द ही ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम की पढ़ाई शुरू की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को बच्चों की सुरक्षा, अधिकारों और संरक्षण से जुड़ी जानकारी प्रदान करना है, ताकि समाज में बाल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ सके।
इस पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को बाल अधिकार, बाल संरक्षण कानून, बच्चों के प्रति होने वाले अपराधों की पहचान और उनकी रोकथाम से जुड़े विषयों की जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी।
युवाओं को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
‘रक्षक’ पाठ्यक्रम के अंतर्गत कॉलेज के विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही बाल संरक्षण से संबंधित कानूनी प्रावधानों और सहायता तंत्र के बारे में भी विद्यार्थियों को जागरूक किया जाएगा।
इस पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह भी बताया जाएगा कि यदि किसी बच्चे के साथ अत्याचार या शोषण की घटना सामने आती है तो उसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों तक कैसे पहुंचाई जाए।
समाज में बढ़ेगी जागरूकता
विशेषज्ञों का कहना है कि बाल सुरक्षा केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। ऐसे में कॉलेज स्तर पर इस तरह के पाठ्यक्रम शुरू होने से युवाओं में जागरूकता बढ़ेगी और वे समाज में सकारात्मक भूमिका निभा सकेंगे।
बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण की पहल
इस पहल का उद्देश्य बच्चों के लिए सुरक्षित और संवेदनशील वातावरण तैयार करना है। विद्यार्थियों को प्रशिक्षित कर समाज में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, जो बाल अधिकारों के प्रति जागरूक हों और जरूरत पड़ने पर सहायता कर सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पाठ्यक्रम से आने वाले समय में बाल सुरक्षा को लेकर समाज में मजबूत आधार तैयार होगा और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूक नागरिकों की नई पीढ़ी तैयार होगी।










