राज्यपाल रमेन डेका से राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त ढोकरा शिल्प कलाकारों ने रायपुर में सौजन्य भेंट की, राज्यपाल ने कलाकारों की कला और विरासत की सराहना की।
रायपुर। राज्यपाल श्री रमेन डेका से राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित ढोकरा शिल्प कलाकारों ने राजधानी रायपुर में सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर राज्यपाल ने कलाकारों को बधाई देते हुए उनके योगदान की सराहना की और कहा कि ढोकरा शिल्प हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अमूल्य हिस्सा है, जिसे संरक्षित और प्रोत्साहित किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि ढोकरा शिल्प न केवल कला का एक रूप है, बल्कि यह आदिवासी समाज की परंपरा, इतिहास और जीवनशैली को भी दर्शाता है। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त करना कलाकारों की वर्षों की मेहनत, साधना और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि ऐसे कलाकार पूरे राज्य और देश का गौरव बढ़ाते हैं।
सौजन्य भेंट के दौरान कलाकारों ने राज्यपाल को ढोकरा शिल्प निर्माण की प्रक्रिया, इसके ऐतिहासिक महत्व और वर्तमान चुनौतियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि आधुनिक समय में बाजार, कच्चे माल और प्रशिक्षण की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। राज्यपाल ने इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उचित समाधान के लिए संबंधित विभागों से समन्वय करने का आश्वासन दिया।
राज्यपाल ने कहा कि सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि पारंपरिक शिल्प और लोक कलाओं को जीवित रखा जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि ढोकरा शिल्प को पर्यटन, हैंडलूम और हस्तशिल्प मेलों से जोड़ा जाए, ताकि कलाकारों को बेहतर बाजार और आर्थिक मजबूती मिल सके।
इस अवसर पर राज्यपाल ने युवाओं से भी पारंपरिक कला की ओर आकर्षित होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि नई पीढ़ी इन शिल्प कलाओं को अपनाएगी, तो यह विरासत आने वाले समय तक सुरक्षित रहेगी। उन्होंने प्रशिक्षण केंद्रों और डिज़ाइन नवाचार पर भी जोर दिया।
कलाकारों ने राज्यपाल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे सम्मान और प्रोत्साहन से उन्हें नई ऊर्जा और प्रेरणा मिलती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य में ढोकरा शिल्प को और अधिक पहचान और समर्थन मिलेगा।
कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कलाकारों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और पारंपरिक शिल्प संरक्षण के लिए निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया।










