पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी मजबूत करने, मोबाइल नेटवर्क विस्तार और राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास पर प्राक्कलन समिति की बैठक में व्यापक चर्चा हुई
रायपुर । के पहाड़ी और दुर्गम इलाकों के विकास को गति देने के उद्देश्य से संसद की प्राक्कलन समिति की बैठक में डिजिटल कनेक्टिविटी और सड़क नेटवर्क विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। इस बैठक में बृजमोहन अग्रवाल ने महत्वपूर्ण सुझाव रखते हुए कहा कि विकास का लाभ देश के अंतिम छोर तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।

प्राक्कलन समिति की दो दिवसीय अध्ययन यात्रा के दूसरे और अंतिम दिन पहलगाम में आयोजित इस बैठक में विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चा का केंद्र बिंदु पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाना और डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाना रहा।
डिजिटल कनेक्टिविटी: दूरस्थ गांवों तक नेटवर्क की चुनौती
बैठक के पहले सत्र में पहाड़ी क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्याओं पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL), संचार मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर प्रशासन के अधिकारियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि भौगोलिक विषमताओं के बावजूद दूरस्थ गांवों तक मजबूत डिजिटल सिग्नल पहुंचाना समय की मांग है। उन्होंने मोबाइल टावरों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ सैटेलाइट आधारित कनेक्टिविटी जैसे विकल्पों को अपनाने पर जोर दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि डिजिटल कनेक्टिविटी केवल संचार का माध्यम नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने का आधार भी है। “जब तक हर गांव डिजिटल रूप से जुड़ा नहीं होगा, तब तक समावेशी विकास संभव नहीं है,” उन्होंने कहा।

राष्ट्रीय राजमार्ग: विकास और अर्थव्यवस्था की रीढ़
बैठक के दूसरे सत्र में पहाड़ी राज्यों में सड़क नेटवर्क के विस्तार और सुदृढ़ीकरण पर चर्चा हुई। इसमें सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और NHIDCL के अधिकारियों ने भाग लिया।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मजबूत सड़क नेटवर्क किसी भी क्षेत्र की आर्थिक प्रगति की रीढ़ होता है। बेहतर सड़कों से न केवल आवागमन आसान होता है, बल्कि पर्यटन, व्यापार और रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सड़क निर्माण में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाए और पर्यावरणीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही, सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन जरूरी
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि पहाड़ी क्षेत्रों में विकास कार्यों के दौरान पर्यावरण संरक्षण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि सड़क निर्माण और अन्य परियोजनाओं में टिकाऊ तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए ताकि प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान न पहुंचे।
इस संदर्भ में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए योजनाओं को आगे बढ़ाएं।
अध्ययन यात्रा को बताया सफल
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इस दो दिवसीय अध्ययन यात्रा को अत्यंत सफल बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार, विभिन्न मंत्रालयों और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय से पहाड़ी क्षेत्रों के विकास को नई दिशा मिलेगी।
उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—देश का कोई भी क्षेत्र विकास की दौड़ में पीछे न रहे। चाहे वह पहाड़ हो या मैदानी इलाका, हर नागरिक को समान सुविधाएं मिलनी चाहिए।”
निष्कर्ष
प्राक्कलन समिति की इस बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों के विकास को लेकर गंभीर है। डिजिटल कनेक्टिविटी और मजबूत सड़क नेटवर्क के माध्यम से इन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
आने वाले समय में इन सुझावों के आधार पर योजनाओं को अमल में लाया जाता है, तो यह न केवल स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाएगा, बल्कि देश के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।






