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उत्तराखंड के पूर्व CM बीसी खंडूरी का निधन, तीन दिन का राजकीय शोक

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज भाजपा नेता भुवन चंद्र खंडूरी का मंगलवार सुबह 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने देहरादून के मैक्स सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली, जहाँ वे पिछले करीब 50 दिनों से हृदय संबंधी बीमारियों के चलते भर्ती थे। उनके निधन से राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है, और उत्तराखंड सरकार ने उनके सम्मान में तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शनों के लिए देहरादून स्थित उनके आवास पर रखा गया है, जबकि अंतिम संस्कार बुधवार को हरिद्वार में किया जाएगा।

निधन और अंतिम संस्कार

उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़ा नाम रहे भुवन चंद्र खंडूरी ने मंगलवार सुबह ठीक 11:10 बजे अपनी अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से हृदय संबंधी बीमारियों और उम्र संबंधी जटिलताओं से जूझ रहे थे। पिछले करीब 50 दिनों से देहरादून के मैक्स सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था, जहाँ डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर फैलते ही भाजपा कार्यकर्ताओं, समर्थकों और राज्य के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई। उनके आवास पर नेताओं और समर्थकों का पहुंचना लगातार जारी है, जहां लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। परिजनों के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार बुधवार को हरिद्वार में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

एक गौरवशाली राजनीतिक यात्रा

भुवन चंद्र खंडूरी का जीवन सैन्य सेवा और राजनीति का एक अद्भुत संगम रहा है। उन्होंने भारतीय सेना में एक सम्मानित अधिकारी के रूप में देश की सेवा की थी और मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सेना से अवकाश ग्रहण करने के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और जल्द ही अपनी ईमानदारी और कर्मठता के लिए पहचाने जाने लगे। वे चार बार लोकसभा सांसद चुने गए, जिनमें से तीन बार उन्होंने पौड़ी गढ़वाल सीट का प्रतिनिधित्व किया। उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद उन्होंने राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे, पहली बार 2007 से 2009 तक और फिर 2011 से 2012 तक। मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को राज्य के विकास और सुशासन के लिए याद किया जाता है। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया और कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए, जिनसे राज्य की छवि को नई दिशा मिली। उनकी साफ-सुथरी छवि और सरल व्यक्तित्व ने उन्हें आम जनता के बीच लोकप्रिय बनाया।

शोक की लहर और प्रतिक्रियाएं

भुवन चंद्र खंडूरी के निधन पर उत्तराखंड सहित पूरे देश के राजनीतिक नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके निधन को राज्य और भाजपा के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि खंडूरी जी का जीवन जनसेवा और राष्ट्रसेवा को समर्पित था। पूर्व मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि खंडूरी जी ने अपना पूरा जीवन देश और संगठन को समर्पित कर दिया। राज्य सरकार ने उनके सम्मान में तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है, जिसका अर्थ है कि इस अवधि में सरकारी कार्यालयों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और कोई भी आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा। यह घोषणा उनके प्रति राज्य के सम्मान और कृतज्ञता को दर्शाती है।

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विरासत और योगदान

भुवन चंद्र खंडूरी ने उत्तराखंड के निर्माण और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। एक दूरदर्शी नेता के रूप में, उन्होंने राज्य को एक स्थिर और प्रगतिशील दिशा देने का प्रयास किया। उनका स्वच्छ प्रशासन और ईमानदारी के प्रति प्रतिबद्धता हमेशा याद की जाएगी। उन्होंने न केवल राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित किया, बल्कि सामाजिक न्याय और लोक कल्याण के मुद्दों पर भी सक्रिय रहे। मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) के रूप में उनकी सैन्य पृष्ठभूमि ने उन्हें एक अनुशासित और कर्तव्यनिष्ठ राजनेता बनाया। उनका निधन उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास में एक युग का अंत है, लेकिन उनके विचार और आदर्श आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। उनके निधन से उत्तराखंड ने एक सच्चा सपूत और एक अनुभवी मार्गदर्शक खो दिया है।

Dipti Das
लेखक / Author

दीप्ति दास दबंग आवाज़ की संवाददाता हैं, जो विभिन्न विषयों पर सटीक और संतुलित रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं।

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