मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती भगवान श्रीराम की स्मृतियों से जुड़ी है और यहां के कण-कण में राम की आस्था बसती है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती भगवान श्रीराम की पावन स्मृतियों से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इस राज्य के कण-कण में भगवान श्रीराम की आस्था और संस्कृति समाई हुई है। मुख्यमंत्री ने यह बात एक कार्यक्रम के दौरान कही, जहां उन्होंने प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के महत्व पर प्रकाश डाला।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रामायण काल में भगवान श्रीराम ने अपने वनवास के दौरान छत्तीसगढ़ के अनेक स्थानों का भ्रमण किया था। इसी कारण यहां की धरती पर रामायण से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं और ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश भगवान श्रीराम के पदचिह्नों से पवित्र हुआ है।
राम वनगमन पथ की विशेषता
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में राम वनगमन पथ से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्थल मौजूद हैं, जिनका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। राज्य सरकार इन स्थलों के संरक्षण और विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होंने बताया कि राम वनगमन पथ परियोजना के माध्यम से इन स्थानों को पर्यटन और आस्था के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
संस्कृति और आस्था का केंद्र
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में भगवान श्रीराम के प्रति गहरी श्रद्धा और विश्वास दिखाई देता है। यहां के लोकगीतों, परंपराओं और धार्मिक आयोजनों में राम कथा और रामायण की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई गांवों और मंदिरों में आज भी रामायण से जुड़ी परंपराएं जीवित हैं। लोग बड़े श्रद्धा भाव से भगवान श्रीराम की पूजा करते हैं और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करते हैं।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि राम वनगमन पथ और अन्य धार्मिक स्थलों के विकास से छत्तीसगढ़ में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी। इससे देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को यहां की सांस्कृतिक विरासत को जानने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले।
श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि भगवान श्रीराम केवल आस्था के प्रतीक ही नहीं हैं, बल्कि वे आदर्श जीवन और मर्यादा के प्रतीक भी हैं। उनके जीवन से हमें सत्य, धर्म और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश मिलता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर समाज में शांति, सद्भाव और नैतिक मूल्यों को मजबूत किया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ की पहचान से जुड़ा रामायण
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान केवल प्राकृतिक संसाधनों और संस्कृति से ही नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम से जुड़ी पौराणिक परंपराओं से भी है। यह प्रदेश रामायण काल की अनेक घटनाओं का साक्षी रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के संरक्षण और विकास के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस समृद्ध विरासत को समझ सकें।
मुख्यमंत्री के इस वक्तव्य ने यह स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान में भगवान श्रीराम का विशेष स्थान है। उनकी स्मृतियां आज भी प्रदेश की आस्था, परंपरा और संस्कृति में जीवित हैं।







