रायपुर। छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “एक पेड़ माँ के नाम, एक सोखता संतान के नाम” अभियान को लेकर सांसद श्री विजय बघेल ने लोगों से सक्रिय भागीदारी की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने की महत्वपूर्ण पहल है।
सांसद श्री विजय बघेल ने अभियान से जुड़े कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बढ़ते प्रदूषण, भूजल स्तर में गिरावट और जल संकट जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपनी मां के नाम पर एक पेड़ लगाए और अपनी संतान के नाम पर एक सोखता गड्ढा बनाए, तो इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जल संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
उन्होंने बताया कि पेड़ लगाने से जहां हरियाली बढ़ेगी और वातावरण शुद्ध होगा, वहीं सोखता निर्माण से वर्षा जल का संरक्षण होगा और भूजल स्तर में सुधार आएगा। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इस अभियान का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
सांसद ने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में पौधारोपण करने की अपील करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने युवाओं, महिलाओं और सामाजिक संगठनों से इस अभियान में भाग लेकर जनजागरूकता फैलाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने भी जल संकट और जल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि लगातार घटते भूजल स्तर को बचाने के लिए वर्षा जल संचयन और सोखता निर्माण बेहद जरूरी है। इससे भविष्य में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है।
अभियान के दौरान लोगों ने पौधारोपण किया और जल संरक्षण का संकल्प लिया। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने अभियान को जनआंदोलन बनाने की बात कही। कार्यक्रम में बच्चों और युवाओं ने भी उत्साह के साथ भाग लिया।
श्री विजय बघेल ने कहा कि छोटे-छोटे प्रयास बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं। यदि हर परिवार पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए जिम्मेदारी निभाए, तो प्रदेश में हरियाली बढ़ाने और जल संकट कम करने में बड़ी सफलता मिल सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य और केंद्र सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही हैं, लेकिन जनभागीदारी के बिना इन अभियानों की सफलता संभव नहीं है। इसलिए सभी नागरिकों को जागरूक होकर इस दिशा में काम करना होगा।
कार्यक्रम के अंत में लोगों को पर्यावरण संरक्षण और जल बचाने का संदेश दिया गया। अभियान को लेकर लोगों में उत्साह देखने को मिला और इसे समाज के लिए सकारात्मक पहल बताया गया।










