केन्द्रीय पर्यवेक्षकों ने छत्तीसगढ़ में पशुधन योजनाओं की समीक्षा कर पशुपालकों से फीडबैक लिया, दुग्ध उत्पादन, टीकाकरण और आजीविका सुधार पर चर्चा हुई।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में संचालित पशुधन विकास और पशुपालक कल्याण से जुड़ी योजनाओं की प्रगति का आकलन करने के लिए केन्द्रीय पर्यवेक्षकों की टीम ने राज्य का दौरा कर विभिन्न जिलों से फीडबैक लिया। इस दौरान पशुपालन विभाग के अधिकारियों, स्थानीय प्रशासन और पशुपालकों के साथ बैठक कर योजनाओं के क्रियान्वयन और चुनौतियों पर चर्चा की गई। टीम ने जमीनी स्तर पर जाकर योजनाओं के प्रभाव का भी निरीक्षण किया।
केन्द्रीय पर्यवेक्षकों ने पशुधन स्वास्थ्य सेवाएं, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की पहल, टीकाकरण अभियान और पशुपालकों को दी जा रही आर्थिक सहायता से जुड़ी जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में पशुधन आधारित आजीविका को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य किसानों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाना है।
दौरे के दौरान पर्यवेक्षकों ने ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा केंद्रों और डेयरी गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने पशुपालकों से सीधे संवाद कर योजनाओं से मिलने वाले लाभ और सामने आने वाली समस्याओं के बारे में जानकारी ली। कई पशुपालकों ने बताया कि टीकाकरण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से पशुओं की उत्पादकता में सुधार हुआ है, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि हुई है।
अधिकारियों ने कहा कि सरकार पशुधन क्षेत्र में तकनीक आधारित सेवाओं को बढ़ावा दे रही है। मोबाइल वेटनरी यूनिट, डिजिटल रिकॉर्ड और आधुनिक पशुपालन तकनीकों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सेवाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। केन्द्रीय टीम ने इन पहलों की सराहना करते हुए सुझाव भी दिए, ताकि योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।
बैठक के दौरान पशुधन बीमा योजना, नस्ल सुधार कार्यक्रम और चारा विकास योजनाओं पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके विकास से किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलता है। पर्यवेक्षकों ने कहा कि योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए नियमित निगरानी और स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण जरूरी है।
राज्य के अधिकारियों ने केन्द्रीय टीम को बताया कि महिला स्व-सहायता समूहों को भी पशुपालन गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, जिससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल रहा है। कई जिलों में डेयरी और बकरी पालन के माध्यम से महिलाओं ने सफल उदाहरण प्रस्तुत किए हैं।
दौरे के अंत में केन्द्रीय पर्यवेक्षकों ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पशुधन योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है और आने वाले समय में इन योजनाओं को और बेहतर बनाने के लिए सुझाव केंद्र सरकार को भेजे जाएंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य के समन्वय से पशुधन क्षेत्र में और विकास संभव है।
छत्तीसगढ़ में पशुधन योजनाओं की समीक्षा को ग्रामीण विकास और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस पहल से पशुपालकों को बेहतर सुविधाएं और योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने की उम्मीद है।







