रायपुर में आयोजित भव्य कार्यक्रम में प्रदेशभर से जुटे कार्यकर्ता, प्रो. यशवंतराव केलकर के विचारों पर चर्चा और युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित किया गया
रायपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा प्रो. यशवंतराव केलकर की जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर रायपुर में “प्रिय केलकर जी” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के इस आयोजन में प्रदेशभर से आए पूर्व और वर्तमान कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों तथा विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम का आयोजन पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में हुआ, जहां पूरे परिसर में उत्साह और ऊर्जा का माहौल देखने को मिला।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल स्मरण नहीं, बल्कि प्रो. केलकर के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और संगठनात्मक मूल्यों को मजबूत करना भी रहा। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने उनके जीवन, कार्यशैली और संगठन निर्माण में उनके योगदान को विस्तार से साझा किया।
प्रमुख अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में कई प्रमुख अतिथियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें वीरेंद्र सिंह सोलंकी, नवीन मारकंडे, सलीम राज, गुरुचरण सिंह होरा और नंदन जैन सहित अन्य गणमान्य लोग शामिल रहे।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में प्रो. केलकर के संगठनात्मक कौशल, उनके नेतृत्व और युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की उनकी सोच को वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक बताया।
युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करने पर जोर
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में युवाओं की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। गुरुचरण सिंह होरा ने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के आयोजन युवा पीढ़ी को सही दिशा देने के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी को भी मजबूत करते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रो. केलकर जैसे विचारकों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर युवाओं को संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए। इससे न केवल व्यक्तिगत विकास होता है, बल्कि देश निर्माण की प्रक्रिया को भी गति मिलती है।

प्रो. यशवंतराव केलकर: विचार और योगदान
यशवंतराव केलकर भारतीय छात्र आंदोलन के एक प्रमुख स्तंभ रहे हैं। उन्हें विशेष रूप से ABVP के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत बनाने और उसे राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए जाना जाता है।
उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के निर्माण का आधार भी है। उनके विचारों में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
उनकी सोच थी कि यदि युवा सही दिशा में संगठित होकर काम करें, तो वे देश में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। यही कारण है कि आज भी उनके विचार छात्र संगठनों और युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं।
संगठनात्मक चर्चा और कार्यकर्ताओं का उत्साह
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सत्रों में संगठनात्मक विषयों पर भी चर्चा की गई। कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभव साझा किए और संगठन को और मजबूत बनाने के लिए सुझाव प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में मौजूद युवाओं और कार्यकर्ताओं का उत्साह देखने लायक था। पूरे आयोजन के दौरान जोश, ऊर्जा और सकारात्मकता का माहौल बना रहा। यह स्पष्ट रूप से दिखाई दिया कि प्रो. केलकर के विचार आज भी युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं।
निष्कर्ष
“प्रिय केलकर जी” कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह एक प्रेरणादायक मंच साबित हुआ, जहां युवाओं को अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का बोध कराया गया। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि यदि युवा सही मार्गदर्शन और प्रेरणा के साथ आगे बढ़ें, तो वे देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
प्रो. यशवंतराव केलकर की जन्मशताब्दी के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल उनके योगदान को याद करने का माध्यम बना, बल्कि भविष्य के लिए एक नई दिशा भी तय करता नजर आया।










