स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में आयुर्वेद महाविद्यालय रायपुर की 24वीं कार्यकारिणी बैठक हुई, जिसमें शिक्षा, शोध और अस्पताल सुविधाओं से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
रायपुर। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, रायपुर की स्वशासी कार्यकारिणी समिति की 24वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में महाविद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक और बुनियादी ढांचे से संबंधित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। आयुर्वेद शिक्षा को आधुनिक तकनीक और अनुसंधान के साथ जोड़ने तथा महाविद्यालय को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने पर विस्तृत चर्चा हुई।
शैक्षणिक गुणवत्ता को बढ़ाने पर विशेष जोर
बैठक में मंत्री जायसवाल ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय हो रही है और इस क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों के लिए असीम संभावनाएं हैं।
उन्होंने निर्देश दिया कि—
- शिक्षण पद्धति को और आधुनिक बनाया जाए,
- प्रैक्टिकल आधारित शिक्षण बढ़ाया जाए,
- अनुसंधान गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाए,
- और छात्रों को एडवांस तकनीक से परिचित कराया जाए।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को विज्ञान और व्यवहारिक प्रयोग के रूप में प्रस्तुत करना समय की आवश्यकता है।
नए कोर्स और शोध परियोजनाओं पर चर्चा
बैठक में कई प्रस्ताव सामने आए, जिनमें—
- विशेष चिकित्सकीय शाखाओं में नई सीटें,
- शोध परियोजनाओं का विस्तार,
- औषधीय पौधों की खेती,
- क्लिनिकल रिसर्च यूनिट की स्थापना
जैसे मुद्दे शामिल रहे।
मंत्री ने कहा कि छात्रों को आयुर्वेदिक फार्मेसी, पंचकर्म और आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों में भी प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर लिए गए निर्णय
महाविद्यालय परिसर के विस्तार और उन्नयन पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
इसमें—
- नई प्रयोगशालाएँ,
- आधुनिक पंचकर्म कक्ष,
- डिजिटल लाइब्रेरी,
- छात्रावास सुविधाओं का सुधार
जैसे प्रस्तावों को प्राथमिकता दी गई।
मंत्री ने कहा कि बेहतर सुविधाएँ मिलने से छात्रों और मरीजों दोनों को लाभ होगा।
अस्पताल सेवाओं को और मजबूत करने पर जोर
शासकीय आयुर्वेद अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने को देखते हुए—
- नई चिकित्सा इकाइयों,
- विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति,
- आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता
पर भी चर्चा हुई।
मंत्री ने निर्देश दिया कि OPD सेवाओं को और प्रभावी बनाया जाए और आयुर्वेदिक इलाज को आमजन तक सुलभ रूप में पहुँचाया जाए।
संकाय सदस्यों ने दिए सुझाव
बैठक में मौजूद सीनियर प्रोफेसरों और समिति सदस्यों ने—
- पाठ्यक्रम में नवाचार,
- इंटर्नशिप बढ़ाने,
- अनुसंधान सहयोग,
- और राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थानों के साथ MoU
जैसे सुझाव दिए।
मंत्री ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुना और आवश्यकतानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया।
आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद—
- जीवनशैली सुधार,
- रोग प्रतिरोधक क्षमता,
- और संपूर्ण स्वास्थ्य
के लिए अत्यंत उपयोगी प्रणाली है और राज्य इसका विस्तार प्राथमिकता के साथ करेगा।
छात्रों और मरीजों के हित में कई निर्णय
बैठक में यह भी तय हुआ कि—
- छात्रों के लिए नए प्रशिक्षण कार्यक्रम,
- कार्यशालाएँ,
- राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय सेमिनार
आयोजित किए जाएँगे।
साथ ही, गरीब और ग्रामीण मरीजों के लिए नि:शुल्क चिकित्सा शिविरों की संख्या बढ़ाने का निर्णय भी लिया गया।
समिति की बैठक सफलतापूर्वक सम्पन्न
अधिकारियों ने बताया कि बैठक रचनात्मक माहौल में सम्पन्न हुई और कई महत्वपूर्ण सुधारात्मक प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया गया।
मंत्री जायसवाल ने अंत में सभी सदस्यों को धन्यवाद देते हुए कहा कि आयुर्वेद महाविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी संस्थान बनाने की दिशा में तेज़ी से कदम उठाए जाएंगे।







