‘दीदी के गोठ’ के पाँचवें एपिसोड में जेंडर अभियान ‘नई चेतना 4.0’ पर चर्चा हुई, जिसमें महिलाओं की जागरूकता, समानता और सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश प्रसारित किए गए।
रायपुर। राज्य में महिलाओं की जागरूकता, समानता और सशक्तिकरण को समर्पित लोकप्रिय कार्यक्रम ‘दीदी के गोठ’ का पाँचवाँ एपिसोड आज प्रसारित किया गया। इस एपिसोड का मुख्य फोकस था— जेंडर अभियान ‘नई चेतना 4.0’, जिसके माध्यम से समाज में लैंगिक समानता, महिलाओं के अधिकार और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।
जेंडर अभियान ‘नई चेतना 4.0’—समाज में बदलाव का प्रयास
कार्यक्रम में विस्तार से बताया गया कि ‘नई चेतना 4.0’ का उद्देश्य महिलाओं और पुरुषों दोनों में जेंडर सेंसिटिविटी विकसित करना है।
अभियान से जुड़े मुख्य बिंदु—
- महिलाओं और बालिकाओं के हितों की सुरक्षा,
- घरेलू हिंसा के खिलाफ जागरूकता,
- शिक्षा और रोजगार में समान अवसर,
- समुदाय स्तर पर महिला नेतृत्व को बढ़ावा।
यह बताया गया कि अभियान का लक्ष्य सिर्फ महिलाओं को मजबूत बनाना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण और समानता की संस्कृति को स्थापित करना है।
महिला समूहों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी
एपिसोड में विभिन्न जिलों की महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि—
- स्व-सहायता समूहों में सहभागिता,
- वित्तीय सशक्तिकरण,
- सरकारी योजनाओं की जानकारी
ने उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन लाया है।
कई महिलाओं ने कहा कि ‘नई चेतना’ अभियान ने घर–परिवार से समाज स्तर तक उनके प्रति सोच में सकारात्मक बदलाव पैदा किया है।
जेंडर समानता का संदेश—परिवार से समाज तक
कार्यक्रम में चर्चा हुई कि जेंडर समानता की शुरुआत परिवार से होती है।
संदेश दिया गया कि—
- बेटों और बेटियों को समान अवसर,
- शिक्षा का अधिकार,
- घरेलू जिम्मेदारियों में बराबरी
जैसी चीजें एक स्वस्थ समाज की नींव रखती हैं।
‘दीदी के गोठ’ के माध्यम से यह संदेश दूरदराज़ के ग्रामीण इलाकों तक पहुँच रहा है।
महिलाओं की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर
एपिसोड में महिलाओं की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़ी सरकारी योजनाओं को सरल भाषा में समझाया गया।
इसमें शामिल थे—
- महिला हेल्पलाइन 181,
- वन स्टॉप सेंटर,
- स्वावलंबन योजनाएँ,
- कौशल विकास कार्यक्रम।
बताया गया कि इन योजनाओं का सही उपयोग महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाता है।
स्कूलों और कॉलेजों में भी हो रही गतिविधियाँ
‘नई चेतना 4.0’ अभियान के अंतर्गत स्कूलों और कॉलेजों में—
- जागरूकता रैली,
- नाटक,
- पोस्टर प्रतियोगिता,
- जेंडर इक्विटी वर्कशॉप
आयोजित की जा रही हैं।
इससे युवा पीढ़ी में जेंडर संवेदनशीलता बढ़ रही है।
समुदाय स्तर पर हो रहे परिवर्तन
एपिसोड में कई उदाहरण दिए गए जहाँ—
- पंचायतें,
- महिला समितियाँ,
- सामाजिक संगठन
जेंडर समानता के संदेश को आगे बढ़ा रहे हैं।
कई गांवों में बाल विवाह रोकने, बालिकाओं के स्कूल प्रवेश बढ़ाने और नशा उन्मूलन जैसी गतिविधियों को भी सराहनीय बताया गया।
दीदी के गोठ—महिलाओं की आवाज़ का मंच
‘दीदी के गोठ’ अब ग्रामीण महिलाओं के लिए ऐसा मंच बन चुका है जहाँ—
- वे अपनी समस्याएँ बता सकती हैं,
- समाधान समझ सकती हैं,
- और सरकारी योजनाओं से सीधे जुड़ सकती हैं।
यह रेडियो/टीवी आधारित कार्यक्रम राज्य में व्यवहारिक और सकारात्मक सामाजिक बदलाव का माध्यम बन रहा है।
एपिसोड को मिली अच्छी प्रतिक्रिया
प्रसारण के बाद सोशल मीडिया और सामुदायिक समूहों में कार्यक्रम की सराहना की गई।
महिलाओं ने कहा कि इस तरह की जानकारी उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देती है।
समाजसेवियों ने भी अभियान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की अपील की।






