छत्तीसगढ़ सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए अभिनव योजनाएं शुरू कीं — यह मॉडल पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक सहभागिता को प्राथमिकता देते हुए एक ऐसा “आदर्श सामाजिक मॉडल” प्रस्तुत किया है, जो पूरे देश के लिए उदाहरण बन रहा है। राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को सम्मानजनक और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से कई कल्याणकारी योजनाएं, आवासीय सुविधाएं, स्वास्थ्य सेवाएं और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
वरिष्ठ नागरिक सम्मान राज्य की प्राथमिकता
राज्य सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों को समाज का सम्माननीय हिस्सा मानते हुए कहा है कि “बुजुर्गों के अनुभव और मार्गदर्शन से ही समाज की दिशा तय होती है।”
राज्य के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित योजनाएं जैसे वरिष्ठ नागरिक पेंशन योजना, निर्बल वर्ग सहायता, और वरिष्ठजन सहायता केंद्र, बुजुर्गों को आत्मसम्मान और सुरक्षा दोनों प्रदान कर रही हैं।
‘नवा छत्तीसगढ़’ में बुजुर्गों की भूमिका महत्वपूर्ण
राज्य के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि “छत्तीसगढ़ के विकास की यात्रा में वरिष्ठ नागरिकों का अनुभव हमारी सबसे बड़ी पूंजी है।”
सरकार ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ‘वरिष्ठ जन मित्र केंद्र’ स्थापित किए हैं, जहां बुजुर्ग अपने अनुभव साझा कर सकते हैं, स्वास्थ्य जांच करा सकते हैं और समाजसेवा में भाग ले सकते हैं।
आवासीय और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
राज्य में वृद्धाश्रमों और डे केयर सेंटरों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। इन केंद्रों में चिकित्सा सुविधाएं, मनोरंजन, योग, ध्यान और सामुदायिक गतिविधियों की व्यवस्था की गई है।
राज्य सरकार ने ‘वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य कार्ड योजना’ भी शुरू की है, जिसके तहत बुजुर्गों को निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, औषधि और चिकित्सकीय परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
स्वास्थ्य विभाग ने बुजुर्गों के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट्स भी संचालित की हैं, जो दूरस्थ गांवों में जाकर वरिष्ठ नागरिकों की नियमित जांच करती हैं।
सुरक्षा और कानूनी संरक्षण
छत्तीसगढ़ पुलिस ने वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए ‘सीनियर सिटीजन हेल्पलाइन’ (1090) शुरू की है।
इसके अलावा, ‘वरिष्ठ नागरिक सुरक्षा पंजीकरण अभियान’ के तहत बुजुर्गों के घरों का डाटा स्थानीय थानों में दर्ज किया जा रहा है, ताकि आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।
मेन्टेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटिजंस एक्ट, 2007 के तहत सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि बुजुर्गों को उनके परिवारों से उचित देखभाल और आर्थिक सहयोग मिले।
सामाजिक जुड़ाव और आत्मनिर्भरता पर जोर
राज्य सरकार ने बुजुर्गों के आत्मसम्मान को बनाए रखने के लिए स्वरोजगार प्रशिक्षण, कला एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम, और ‘एक दिन की मुस्कान’ पहल शुरू की है।
इस पहल में बुजुर्गों को समाज के युवा वर्ग से जोड़कर उन्हें नई ऊर्जा और सामाजिक सम्मान का अनुभव कराया जाता है।
डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में कदम
छत्तीसगढ़ में ‘ई-वरिष्ठ सेवा पोर्टल’ लॉन्च किया गया है, जहां बुजुर्ग घर बैठे अपनी पेंशन, चिकित्सा सहायता, और शिकायतों की स्थिति देख सकते हैं।
यह पोर्टल राज्य के हर जिले में वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल सेवाओं तक पहुंच दिलाने का प्रयास कर रहा है।
सांस्कृतिक और भावनात्मक पहलू
राज्य में ‘वरिष्ठ जन सम्मान दिवस’ और ‘जीवन गौरव समारोह’ जैसे आयोजन किए जाते हैं, जिनमें बुजुर्गों को समाज में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जाता है।
स्कूलों और कॉलेजों में ‘जनसंस्कार कार्यक्रम’ के तहत युवाओं को बड़ों का सम्मान करने और पारिवारिक मूल्यों को अपनाने की शिक्षा दी जा रही है।
ग्राम स्तर पर सामुदायिक कार्यक्रम
ग्राम पंचायतों में वरिष्ठ नागरिक समितियाँ गठित की जा रही हैं, जो गांव के बुजुर्गों की समस्याओं को स्थानीय स्तर पर हल करने में मदद करती हैं।
इन समितियों के माध्यम से स्वास्थ्य शिविर, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक संवाद जैसे आयोजन नियमित रूप से किए जा रहे हैं।
निष्कर्ष : बुजुर्गों का सम्मान ही समाज की पहचान
छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास केवल एक कल्याणकारी पहल नहीं, बल्कि मानवता और संस्कृति की जड़ों को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, दोनों ने अपने संदेशों में कहा है कि “वरिष्ठ नागरिक केवल परिवार नहीं, पूरे समाज की धरोहर हैं। उनका सम्मान करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।”
छत्तीसगढ़ का यह संवेदनशील और समावेशी मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहा है, जहां विकास के साथ मानवीयता भी समान रूप से आगे बढ़ रही है।






