राज्यपाल रमेन डेका ने आकांक्षी जिलों में मानवीय संवेदना के साथ विकास कार्य करने का आह्वान किया, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका पर जोर दिया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि राज्य के आकांक्षी जिलों में विकास कार्यों को केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक विकास योजना का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना होना चाहिए, ताकि समाज के वंचित वर्गों को भी मुख्यधारा में जोड़ा जा सके।
राज्यपाल श्री डेका ने राजभवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों से संवाद करते हुए कहा कि आकांक्षी जिले केवल सरकारी योजनाओं के आंकड़ों का केंद्र नहीं हैं, बल्कि ये वो क्षेत्र हैं जहां विकास की वास्तविक परीक्षा होती है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और आजीविका के क्षेत्रों में बेहतर कार्य योजनाएं बनाने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने दिया ‘संवेदनशील प्रशासन’ का मंत्र
राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि विकास तभी सार्थक होगा जब उसमें मानवता का भाव शामिल हो। उन्होंने कहा, “राज्य के अधिकारी और कर्मचारी यदि प्रशासनिक दृष्टिकोण के साथ-साथ भावनात्मक जुड़ाव रखें, तो विकास की गति दोगुनी हो सकती है।”
उन्होंने आकांक्षी जिलों के जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, स्वास्थ्यकर्मियों और सामाजिक संगठनों को विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष जोर
बैठक में राज्यपाल ने कहा कि आकांक्षी जिलों में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्कूलों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ-साथ शिक्षकों की नियमित उपस्थिति पर भी निगरानी रखी जानी चाहिए।
स्वास्थ्य सेवाओं में मातृ और शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि “स्वस्थ समाज ही समृद्ध समाज की नींव होता है। यदि बच्चों और माताओं का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा तो भविष्य की पीढ़ी भी मजबूत होगी।”
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका के अवसर
राज्यपाल ने कहा कि आत्मनिर्भरता ही वास्तविक विकास की पहचान है। आकांक्षी जिलों में कृषि आधारित उद्योग, हस्तशिल्प, वनोपज प्रसंस्करण और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया जा सकता है।
उन्होंने जिला प्रशासन से कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में युवाओं और महिलाओं के लिए रोज़गार आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएं, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
डिजिटल और सामाजिक नवाचार की जरूरत
राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि आधुनिक तकनीक का उपयोग कर सरकारी सेवाओं की पहुंच को सरल बनाया जाए। डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से ग्रामीण नागरिकों को योजनाओं की जानकारी देने, शिकायत दर्ज करने और समाधान पाने की सुविधा दी जाए।
उन्होंने कहा कि “टेक्नोलॉजी तभी सार्थक है जब उसका उपयोग जनसेवा में हो।”
अधिकारियों से लिया फीडबैक
बैठक के दौरान विभिन्न विभागों के सचिवों और जिलाधिकारियों ने अपने जिलों में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी दी। राज्यपाल ने उन अधिकारियों की सराहना की जिन्होंने अपने जिलों में शिक्षा और स्वच्छता के क्षेत्र में नवाचार किए हैं।
उन्होंने कहा कि “हर जिले की अपनी चुनौतियां और अपनी ताकत होती है। इनका सही उपयोग ही विकास की दिशा तय करता है।”
सामाजिक संगठनों की भूमिका पर बल
राज्यपाल ने गैर-सरकारी संगठनों, महिला स्व-सहायता समूहों और युवा समितियों को भी विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार अकेले सब कुछ नहीं कर सकती, इसलिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा।
निष्कर्ष : समावेशी और संवेदनशील विकास का आह्वान
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने अंत में कहा कि छत्तीसगढ़ के आकांक्षी क्षेत्र अब तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन असली लक्ष्य तभी पूरा होगा जब विकास का लाभ हर घर और हर व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे अपने कार्य को केवल नौकरी न समझें, बल्कि एक सेवा और संवेदना का मिशन मानकर आगे बढ़ें।






