रायपुर में राज्यपाल विश्वभूषण डेका ने स्वास्थ्य कार्यक्रम में कहा कि खान-पान और जीवनशैली प्रकृति से जुड़ी होनी चाहिए। प्राकृतिक आहार, व्यायाम और योग को अपनाने पर जोर दिया।
रायपुर। रायपुर में आयोजित एक स्वास्थ्य-जागरूकता कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री विश्वभूषण डेका ने नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि तेज़ रफ्तार जीवनशैली, बदलते खान-पान और आधुनिक सुविधाओं के बीच लोग प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मानव शरीर प्रकृति के अनुरूप बना है, इसलिए जीवनशैली और आहार भी प्राकृतिक सिद्धांतों के अनुकूल होना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि आज दुनिया में ज्यादातर बीमारियाँ गलत आदतों, तनाव, अनियमित खान-पान और प्रदूषण के कारण बढ़ रही हैं। ऐसे में केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय लोगों को प्रकृति आधारित जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता है।
“प्राकृतिक आहार शरीर के लिए सबसे उपयुक्त”
अपने संबोधन में राज्यपाल श्री डेका ने बताया कि पारंपरिक भारतीय आहार पोषक, संतुलित और स्वास्थ्यवर्धक होता है।
उन्होंने कहा—
- ताज़ी सब्जियाँ, फल, अनाज और स्थानीय खाद्य पदार्थ शरीर को संतुलन देते हैं
- फास्ट फूड और अधिक तेल-मसाले वाली चीजें शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया को बाधित करती हैं
- पानी का पर्याप्त सेवन और नियमित भोजन समय पालन सबसे महत्वपूर्ण है
उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी डाइट में प्राकृतिक और स्थानीय खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि शरीर उन तत्वों को आसानी से स्वीकार करता है जो उसी वातावरण में उत्पन्न होते हैं।
“प्रकृति के खिलाफ जीवनशैली रोगों को जन्म देती है”
राज्यपाल ने जीवनशैली से जुड़े रोगों का उल्लेख करते हुए कहा कि हाइपरटेंशन, डायबिटीज, मोटापा, तनाव और हृदय रोगों का बढ़ना इस बात का संकेत है कि लोग प्रकृति के नियमों से दूर जा रहे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा—
- देर रात जागना
- अनियमित भोजन
- शारीरिक गतिविधि की कमी
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर अत्यधिक निर्भरता
ये सभी आदतें शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
उन्होंने कहा कि शरीर की प्राकृतिक रhythm और जैविक घड़ी के अनुरूप जीवन बिताने से रोगों का खतरा बहुत कम हो जाता है।
योग, व्यायाम और ध्यान को बनाया जाए दिनचर्या का हिस्सा
राज्यपाल श्री डेका ने लोगों को योग, प्राणायाम, ध्यान और नियमित व्यायाम को दैनिक जीवन में शामिल करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि—
- योग मन और शरीर दोनों को संतुलन देता है
- ध्यान से तनाव और चिंता कम होती है
- प्राणायाम फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है
- नियमित व्यायाम से रक्त परिसंचरण सुधरता है
उन्होंने कहा कि इन प्राकृतिक उपायों से व्यक्ति न केवल शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक तौर पर भी स्वस्थ रहता है।
आधुनिक सुविधाओं का सही उपयोग करना सीखें
राज्यपाल ने यह भी कहा कि आधुनिक तकनीक और सुविधाएँ जीवन को आसान बनाने के लिए हैं, लेकिन उनका संतुलित प्रयोग जरूरी है।
उन्होंने चेतावनी दी कि—
- मोबाइल और टीवी पर बढ़ता समय
- लिफ्ट, वाहन और गैजेट पर अत्यधिक निर्भरता
- ऑनलाइन जीवनशैली
इनसे लोग शारीरिक गतिविधि से दूर हो रहे हैं, जो दीर्घकालिक नुकसान देता है।
उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग करें, लेकिन उसके कारण अपनी प्राकृतिक गतिविधियों को सीमित न करें।
पर्यावरण और शरीर का संबंध भी बताया
राज्यपाल ने कहा कि प्रकृति और मनुष्य का गहरा संबंध है।
उन्होंने कहा—
- स्वच्छ हवा
- शुद्ध पानी
- प्राकृतिक प्रकाश
- हरियाली
ये सभी तत्व सीधे मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। इसलिए प्रकृति के संरक्षण को भी जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने पर्यावरण की रक्षा को “स्वास्थ्य संरक्षण का पहला कदम” बताया।
युवाओं और बच्चों के लिए विशेष संदेश
राज्यपाल श्री डेका ने युवाओं और बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि वे डिजिटल उपकरणों में कम समय बिताएँ और बाहरी गतिविधियों में हिस्सा लें।
उन्होंने कहा—
- खेल-कूद
- सुबह-शाम टहलना
- प्राकृतिक वातावरण में समय बिताना
ये गतिविधियाँ बच्चों और युवाओं के शारीरिक तथा मानसिक विकास के लिए आवश्यक हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और उपस्थित लोगों ने किया स्वागत
कार्यक्रम में उपस्थित स्वास्थ्य विशेषज्ञों, अधिकारियों और नागरिकों ने राज्यपाल के संदेश की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह संदेश समाज के लिए अत्यंत उपयोगी है, विशेषकर ऐसे समय में जब लोग जीवनशैली आधारित रोगों से अधिक प्रभावित हैं।
राज्यपाल के विचारों ने लोगों को अपनी आदतों की समीक्षा करने और स्वास्थ्यप्रद बदलाव अपनाने के लिए प्रेरित किया।










