गजेंद्र यादव ने रायपुर बैठक में कहा कि स्कूलों के प्रति प्रेम और समर्पण रखने वाले शिक्षकों की सबसे अधिक आवश्यकता है। राज्य में संसाधनों की कोई कमी नहीं है।
रायपुर। शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी श्री गजेंद्र यादव ने कहा कि आज स्कूलों को सबसे अधिक जरूरत समर्पित, जागरूक और विद्यालय के प्रति प्रेम रखने वाले शिक्षकों की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार शिक्षा के क्षेत्र में संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दे रही, लेकिन इन संसाधनों का सार्थक उपयोग तभी संभव है जब शिक्षक पूरे मनोयोग से विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य देने के लिए कार्य करें।
शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर
रायपुर में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान गजेंद्र यादव ने कहा कि शिक्षा केवल भवन और सुविधाओं पर निर्भर नहीं होती, बल्कि यह पूरी तरह से शिक्षक और छात्र के बीच के सकारात्मक संबंधों पर आधारित होती है।
उन्होंने कहा—
“विद्यालय सुंदर भवनों से नहीं, बल्कि अच्छे शिक्षकों से महान बनते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा को जमीनी स्तर पर मजबूत करना राज्य की प्राथमिकता है, और इसके लिए शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
संसाधनों की नहीं, मानसिकता और जिम्मेदारी की आवश्यकता
गजेंद्र यादव ने चर्चा के दौरान बताया कि—
- स्मार्ट क्लास,
- डिजिटल लर्निंग,
- पुस्तकालय,
- विज्ञान प्रयोगशालाएँ,
- खेल सामग्री
जैसे संसाधन राज्य सरकार निरंतर उपलब्ध करा रही है।
लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि शिक्षक इन संसाधनों का सही उपयोग नहीं करेंगे तो विद्यार्थियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा।
शिक्षकों को बच्चों का मार्गदर्शक बनने की अपील
उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पढ़ाने के लिए जिम्मेदार नहीं, बल्कि—
- विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों का विकास,
- आत्मविश्वास निर्माण,
- व्यवहारिक शिक्षा,
- और भविष्य की दिशा तय करने
में भी प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने शिक्षकों से अपेक्षा की कि वे विद्यालय में बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत बनें।
नियमित उपस्थिति और शिक्षण पद्धति में सुधार की आवश्यकता
बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि कुछ स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति, शिक्षण पद्धति और कक्षा संचालन में सुधार की आवश्यकता है।
यादव ने निर्देश दिए कि—
- कक्षाओं का नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाए,
- बच्चों को सीखने में आनंद आए ऐसा वातावरण बनाया जाए,
- कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए,
- शिक्षकों के प्रशिक्षण को और मजबूत किया जाए।
सरकार चला रही कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक योजनाएँ
उन्होंने कहा कि राज्य में—
- ‘स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’,
- ‘आधुनिक शिक्षण तकनीक’,
- ‘स्पोकन इंग्लिश प्रोग्राम’,
- ‘लर्निंग आउटकम आधारित शिक्षण’
जैसी योजनाएँ लागू की जा रही हैं।
इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों की सक्रिय भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
विद्यालयों में सामुदायिक भागीदारी पर भी जोर
गजेंद्र यादव ने कहा कि शिक्षा केवल सरकार या स्कूल की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समुदाय की भी है।
उन्होंने कहा कि—
- पालक–शिक्षक बैठकें,
- ग्राम शिक्षा समितियाँ,
- स्थानीय नेतृत्व
यदि शिक्षा में सक्रिय योगदान दें तो स्कूलों का स्वरूप बदल सकता है।
भविष्य के लिए प्रोत्साहित हुए शिक्षक
कार्यक्रम में शामिल शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए और कहा कि प्रशासन के इस प्रकार के प्रोत्साहन और मार्गदर्शन से उन्हें शिक्षा में नवाचार करने की प्रेरणा मिलती है।
अंत में गजेंद्र यादव ने दिया संदेश
उन्होंने कहा—
“समर्पित शिक्षक किसी भी समाज की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। राज्य सरकार आपको हर सुविधा दे रही है, अब जरूरत है कि हम सभी मिलकर बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने का संकल्प लें।”






