पद्मविभूषण तीजन बाई AIIMS रायपुर में भर्ती, पीएम मोदी ने हालचाल पूछा, लोककला जगत चिंतित, छत्तीसगढ़ में दुआओं का दौर जारी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की गौरव, पद्म विभूषण से सम्मानित प्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई को स्वास्थ्य खराब होने के बाद एम्स रायपुर (AIIMS Raipur) में भर्ती कराया गया है। उनकी तबीयत बीते कुछ दिनों से नासाज थी, जिसके चलते परिजनों ने उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में दाखिल कराया। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर निगरानी रख रही है।
गौरतलब है कि दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें फोन कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि “तीजन बाई छत्तीसगढ़ की ही नहीं, बल्कि भारत की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं। उनके कला जीवन ने लोकसंस्कृति को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई है।”
🌺 लोककला की स्वर-साधिका तीजन बाई
छत्तीसगढ़ की माटी से निकली तीजन बाई का नाम आज भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में लोककला की पहचान बन चुका है।
उनकी ‘पंडवानी’ शैली — महाभारत की कथाओं को संगीत और अभिनय के साथ प्रस्तुत करने की कला — ने भारतीय लोक संस्कृति को नई दिशा दी।
तीजन बाई ने अपनी अनोखी गायकी से लोककला को ग्रामीण आंगनों से अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाया।
वे जापान, फ्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका जैसे देशों में प्रदर्शन कर चुकी हैं और पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण जैसे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं।
🏥 AIIMS रायपुर में जारी है इलाज, डॉक्टरों की टीम निगरानी में
एम्स रायपुर प्रशासन ने बताया कि तीजन बाई को फेफड़ों और सांस संबंधी परेशानी के चलते भर्ती किया गया है।
उनका इलाज वरिष्ठ चिकित्सकों की देखरेख में चल रहा है।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें पूर्ण आराम की सलाह दी है।
एम्स के निदेशक डॉ. नितिन नागर ने कहा,
“तीजन बाई जी हमारे लिए प्रेरणा हैं।
उनकी स्थिति में सुधार हो रहा है और हम लगातार मेडिकल टीम के साथ उनके स्वास्थ्य पर नजर रखे हुए हैं।”
📞 प्रधानमंत्री मोदी का स्नेहपूर्ण संवाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अक्टूबर को तीजन बाई से फोन पर बात की थी।
उन्होंने उनकी तबीयत पूछते हुए कहा कि वह उनके योगदान से बेहद प्रभावित हैं।
पीएम ने कहा —
“आपकी आवाज और कला ने भारत की आत्मा को अभिव्यक्त किया है।
मैं आपके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।”
प्रधानमंत्री के इस संवाद से तीजन बाई भावुक हो उठीं थीं।
उन्होंने पीएम का आभार व्यक्त करते हुए कहा था कि यह उनके लिए “संगीत से बड़ा सम्मान” है।
🎤 तीजन बाई — छत्तीसगढ़ की संस्कृति की आत्मा
तीजन बाई का जन्म 1956 में गुना गाँव (जिला दुर्ग, अब बालोद) में हुआ था।
वे बचपन से ही महाभारत की कथाएँ सुनतीं और उन्हें गुनगुनाती थीं।
उनकी गुरु चंडा बाई ने उन्हें पंडवानी की कला सिखाई।
तीजन बाई ने इस पारंपरिक शैली में स्त्रियों की भूमिका को केंद्र में लाकर एक नई पहचान बनाई।
उन्होंने न केवल गाने, बल्कि अभिनय और संवाद के माध्यम से पौराणिक प्रसंगों को जीवंत किया।
उनकी कला को देखकर प्रसिद्ध नृत्यांगना मृणालिनी साराभाई और कई विदेशी विद्वानों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रदर्शन का अवसर दिया।
🏆 सम्मान और उपलब्धियाँ
तीजन बाई को भारतीय लोककला के क्षेत्र में किए गए योगदान के लिए अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं —
- पद्मश्री (1988)
- पद्मभूषण (2003)
- पद्मविभूषण (2019)
- कालिदास सम्मान, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार,
- डॉ. भीमराव अंबेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार
- और यूनेस्को की मान्यता तक प्राप्त।
उनके जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी बनी हैं, जिनमें “तीजन बाई: द वॉयस ऑफ पांडवानी” प्रमुख है।
💬 राज्यभर में प्रार्थनाएँ, सांस्कृतिक जगत चिंतित
तीजन बाई की तबीयत बिगड़ने की खबर फैलते ही पूरा छत्तीसगढ़ लोककला जगत चिंतित हो उठा।
राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, और संस्कृति मंत्री चंद्रकांत भोसले ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
राज्यपाल ने कहा —
“तीजन बाई जी छत्तीसगढ़ की आत्मा हैं।
उनके स्वर में हमारी मिट्टी की गंध है, और उनके स्वस्थ रहने से राज्य की संस्कृति जीवंत रहती है।”
वहीं मुख्यमंत्री साय ने ट्वीट किया —
“हमारी लोकसंस्कृति की धरोहर तीजन बाई जी के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।
पूरा छत्तीसगढ़ उनके साथ है।”
🌍 दुनिया भर में फैले उनके चाहने वाले
तीजन बाई के चाहने वाले सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी हैं।
जापान, इंग्लैंड, फ्रांस और अमेरिका में उन्होंने पंडवानी की प्रस्तुति देकर विदेशी दर्शकों को भारतीय संस्कृति से परिचित कराया।
उनकी प्रस्तुति में नाटकीयता, संगीत, और दर्शन का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
विदेशी मंचों पर उन्होंने बताया कि भारत की लोककला कितनी गहरी और भावनात्मक होती है।
🪶 कला की सादगी में छिपा जीवन दर्शन
तीजन बाई हमेशा कहती हैं —
“कला केवल मनोरंजन नहीं, यह जीवन का दर्शन है।
पंडवानी गाना मतलब धर्म, नीति और संघर्ष को समझना।”
उनकी जीवन यात्रा संघर्ष से भरी रही।
गरीबी, समाजिक चुनौतियों और पारिवारिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपनी कला नहीं छोड़ी।
इसी जज्बे ने उन्हें आज लोककला की ‘जीवित किंवदंती’ बना दिया।
🕊️ लोगों की दुआएं और उम्मीदें
AIIMS रायपुर के बाहर सुबह से ही उनके चाहने वाले जुटे हैं।
लोग पूजा-पाठ कर उनके स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर “#GetWellSoonTeejanBai” और “#PrayersForTeejanBai” ट्रेंड कर रहे हैं।
राज्यभर के कलाकारों ने कहा कि
“तीजन दीदी की आवाज हमारे दिलों में है।
वो जल्दी ठीक होंगी, यही हमारी प्रार्थना है।”
🌸 समापन विचार
तीजन बाई केवल एक गायिका नहीं, बल्कि भारत की लोक आत्मा की सशक्त प्रतीक हैं।
उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और सांस्कृतिक गौरव की मिसाल है।
देशभर की दुआएँ उनके साथ हैं — ताकि उनकी आवाज फिर एक बार “जय जय पांडव” के स्वर में गूंजे।






